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Sunday, May 3, 2015

थाली में दाल-रोटी की जगह लेंगे कीड़े

आप शुद्ध शाकाहारी हैं? अगर हां, तो आपके लिए एक बुरी खबर है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने आगाह किया है कि विश्व की आबादी आठ अरब के आसपास पहुंचने की वजह से इतनी बड़ी आबादी का पेट अब सिर्फ शाकाहार से भरना मुश्किल होगा। ऐसे में जल्द लोगों के पास कीड़े-मकोड़े खाने के अलावा कोई दूजा विकल्प नहीं बचेगा।
एफएओ ने हाल में `एडिबल इनसेक्ट्स: फ्यूचर प्रोसपेक्ट्स फॉर फूड एंड फीड सिक्योरिटी` शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से लाभकारी माने जाने वाले ऐसे कीटों की सूची बनाई गई है जिन्हें आप पूरक आहार के रूप में ले सकते हैं। ये कीड़े-मकोड़े भविष्य में कैसे आपकी भूख मिटा सकते हैं?
`मोपेन` नामक इल्ली या सूंडियां ऐसे कीटों में शामिल हैं। इन्हें खाने से पूर्व नमकीन पानी में उबाला और धूप में सुखाया जाता है। इन्हें बिना रेफ्रिजरेटर भी कुछ माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है। एफएओ के मुताबिक, इल्लियां पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक, मैगनीज और कॉपर का एक अच्छा स्रोत हैं।
पोषणयुक्त अन्य कीटों में दीमक भी शामिल हैं। इन्हें तलकर, धूप में सुखाकर, भूनकर या केले के पत्तों पर रखकर भांप लगाकर खाया जा सकता है। आमतौर पर दीमक में 38 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है। टिड्डे भी बड़े पैमाने पर खाए जाते हैं। इन्हें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन देने के लिए जाना जाता है। बदबूदार कीड़े पूरे एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में खाए जाते हैं। खाने से पूर्व इन्हें भूना या पानी में भिगोकर धूप में सुखाया जाता है। ये कीड़े-मकोड़े प्रोटीन, आयरन, पोटेशियम और फास्फोरस सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से समृद्ध होते हैं।

नारियल से ब्लड ग्रुप की जानकारी सिर्फ 10 सेकेंड में!

छत्तीसगढ़ के रायपुर में कृषि विभाग में कार्यरत बी. डी गुहा ने आश्चर्यजनक रूप से नारियल से ब्लड ग्रुप पहचानने की तकनीक ईजाद की है। गुहा किसी भी व्यक्ति को बिना छुए महज 10 सेकेंड में ब्लड ग्रुप बता देते हैं। आमतौर पर नारियल सिर्फ मंदिरों में फोड़ने के काम आता है लेकिन कोई कहे कि यह आपका ब्लड ग्रुप बता सकता है तो सहसा विश्वास नहीं होता। गुहा का दावा है कि वह इससे भरा और खाली सिलेंडर, जमीन के अंदर का पानी, भूमिगत सुरंगों की भी पहचान कर सकते हैं। विभिन्न ब्लड ग्रुप में नारियल अलग-अलग दिशा में क्यों मुड़ता है, इसका वैज्ञानिक कारण जानने के लिए वह अब शोध कर रहे हैं।
चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक 8 ब्लड ग्रुप ए पॉजीटिव, ए निगेटिव, एबी पॉजीटिव, एबी निगेटिव, बी पॉजीटिव, बी निगेटिव, ओ पॉजीटिव और ओ निगेटिव होते हैं।
गुहा बताते हैं कि इनमें से 5 ब्लड ग्रुप. ए पॉजीटिव, एबी पॉजीटिव, बी पॉजीटिव, ओ पॉजीटिव और ओ निगेटिव को वह नारियल से पहचान सकते हैं। बाकी तीन को लेकर भी शोध हो रहा है। चूंकि ये तीनों ब्लड ग्रुप वाले लोगों की संख्या बहुत कम हैं, इसलिए इन्हें पहचानने में समय लग रहा है।
आखिर अलग-अलग ब्लड ग्रुप में नारियल अलग दिशा में क्यों मुड़ जाता है, इसका वैज्ञानिक कारण गुहा खुद नहीं जानते। गुहा इसे पता लगाने के लिए अब शोध कर रहे हैं। इस काम में उनकी मदद कर रही हैं उनकी बेटी सोनाली, मोनाली और बेटा आयुष।
कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग कर रहे उनके तीनों बच्चों को जल्द ही इससे संबंधित वैज्ञानिक कारण पता लगने की उम्मीद है। पत्नी मीनाक्षी भी अब इस कला में विशेषज्ञ हो चुकी हैं।
गुहा बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति के सिर से थोड़ा ऊपर हथेली में नारियल लें। थोड़ी देर में नारियल अलग दिशा में मुड़ जाता है। जिस जगह भूमिगत पानी, या जल आपूर्ति की पाइपलाइन हो, वहां नारियल सही नतीजे नहीं बताता।
ए पॉजीटिव ब्लड ग्रुप होने पर नारियल 45 डिग्री की पोजिशन लेता है। एबी पॉजीटिव में 45 से 55 डिग्री, बी पॉजीटिव में 60 डिग्री, ओ पॉजीटिव में 90 और ओ नेगेटिव में 180 डिग्री की पोजीशन ले लेता है।
गुहा ने बताया कि साल 2005 में बलौदाबाजार के एक स्कूल में पानी के अच्छे स्रोत का पता लगाने के लिए मुझे बुलाया गया था। वहां के बच्चे बहुत शरारत कर रहे थे, उन्हें शांत कराने के लिए मैंने उनसे कहा कि तुम सब एक लाइन में खड़े हो जाओ, मैं जांचूंगा कि तुममें पानी है या नहीं।
मजाक-मजाक में किए गए इस परीक्षण के दौरान मैंने देखा कि कुछ बच्चों के सिर से थोड़ा ऊपर हथेली पर रखा नारियल 90 डिग्री में खड़ा हो गया। मैंने यही प्रयोग घर आकर अपने बच्चों पर किया। फिर, वही हुआ। लैब में बच्चों का ब्लड ग्रुप चेक कराया तो वो ओ पॉजीटिव निकला। बस यहीं से मेरा ये सफर शुरू हो गया। बहरहाल राजधानी का यह गुहा परिवार शोध के बाद कुछ और नई जानकारियां सामने लाने में जुटा हुआ है।

मां का दूध पीने वाले बच्चे पढ़ाई में अच्छे

जो बच्चे मां का दूध पीते हैं, वे ज्यादा तेज दिमाग होते हैं। मां के दूध में कोई ऐसा छुपा गुण होता है, जिससे बच्चे कुशाग्र हो जाते हैं। मां का दूध बच्चे के लिए सबसे पौष्टिक भोजन होता है यह बात तो हमें पता है लेकिन मां के दूध में छुपे गुणों के कारण उनके कुशाग्र होने की बात एक ताजातरीन अध्ययन में कही गई है। अध्ययन के मुताबिक ऐसे बच्चे स्कूल में आमतौर पर दूसरों की तुलना में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
अभी तक शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया था कि जो बच्चे मां का दूध पीकर बड़े होते हैं, वे बुद्धि परीक्षण में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
ऐसा क्यों हैं, इसका पता नहीं लगाया जा सका था। लेकिन अब ताजा अध्ययन में समाजशास्त्रियों ने बच्चों की परवरिश में दो मुख्य बातों का जिक्र किया है, एक तो बच्चे के भावनात्मक संकेतो पर प्रतिक्रिया देना और दूसरा नौ महीने की उम्र से बच्चे को विभिन्न पठन सामग्रियां पढ़ कर सुनाना।
उताह की ब्रिंघम यंग यूनिवर्सिटी के प्रमुख अध्ययनकर्ता बेन गिब्स ने कहा कि अपने बच्चे को दुग्धपान कराने वाली महिलाएं दोनों चीजें करती हैं। यह बच्चे की परवरिश का ही नतीजा है, जो उसे दूसरों से अलग बनाता है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में यह भी पाया कि बच्चों के दब्बू और कमजोर होने का कारण बचपन में अनुकूल परवरिश न होना भी हो सकता है।

वायु प्रदूषण से 2012 में 70 लाख लोग मरे: WHO

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण 2012 में विश्वभर में 70 लाख लोगों की मौत हुई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन में सार्वजनिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य की प्रमुख मारिया नीरा ने कहा, ‘ घर के भीतर और बाहर वायु प्रदूषण अब एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या है और यह विकसित एवं विकासशील दोनों तरह के देशों को प्रभावित कर रही है।’ डब्ल्यूएचओ के नए अनुसंधान के अनुसार वैश्विक स्तर पर 2012 में आठ में से एक व्यक्ति की मौत प्रदूषण से जुड़ी है। प्रदूषण के कारण जो घातक बीमारियां होती हैं, उनमें हृदय संबंधी रोग, फेफड़ों संबंधी बीमारियां और फेफड़ों का कैंसर शामिल हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार वैश्विक स्तर पर प्रदूषण के कारण सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में भारत और इंडोनेशिया समेत दक्षिणपूर्वी एशिया तथा चीन और दक्षिण कोरिया से लेकर जापान और फिलीपीन तक शामिल हैं।
घर के भीतर मुख्य रूप से कोयला, लकड़ी और जैव इंधन स्टोव से खाना बनाने और अन्य कारणों से हुए प्रदूषण से 43 लाख लोगों की मौत हुई है। कोयला ताप आग से लेकर डीजन इंजन तक बाह्य प्रदूषण के स्रोतों से 37 लाख लोगों की जान गई है।

भांग से पड़ सकता है पुरूषों की प्रजनन क्षमता पर असर

अपने तरह के एक बड़े अध्ययन में दावा किया गया है कि भांग का सेवन करने वाले पुरूषों की प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है क्योंकि इससे उनके शुक्राणुओं का आकार प्रभावित होता है।
शैफील्ड और मैनचेस्टर विश्वविद्यालयों के एक अनुसंधान दल ने यह पता लगाने की कोशिश की कि जीवनशैली से जुड़े कारक शुक्राणुओं के आकार को किस तरह प्रभावित करते हैं। उन्होंने पाया कि गर्मी के महीनों में स्खलित वीर्य के शुक्राणुओं का आकार अच्छा नहीं था लेकिन जिन पुरूषों की यौन गतिविधि 6 दिन से अधिक समय बाद हुई उनके शुक्राणुओं का आकार बेहतर था।
धूम्रपान, मद्यपान एवं अन्य मादक पदाथरें के सेवन का भी असर शुक्राणुओं पर देखा गया। ब्रिटेन के करीब 14 प्रजनन केंद्रों में आए 2,249 लोगों से बातचीत के आधार पर किए गए इस अध्ययन के नतीजे ‘ह्यूमन रिप्रोडक्शन’ जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
शैफील्ड विश्वविद्यालय में एंड्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ एलन पेसी ने कहा ‘हमारे आंकड़े सुझाव देते हैं कि भांग का सेवन करने वाले अगर परिवार शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो उनको इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए।’ प्रयोगशाला में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि असामान्य आकार की वजह से शुक्राणु कम असरदार हो जाते हैं। 

मछलियों का दिमाग इंसानों से भी तेज होता है!

मछलियों के बारे में आम धारणा यह है कि उनमें दिमाग नहीं होता और उन्हें दर्द महसूस नहीं होता लेकिन अब एक नए अध्ययन में पता चला है कि मछलियों का दिमाग कई मायनों में हम इंसानों से भी तेज होता है। ऑस्ट्रेलिया की मैक्वोयर युनिवर्सिटी के कुलुम ब्राउन ने एक समीक्षा में लिखा, ‘मछलियों की याददाश्त तेज होती है।यहां तक कि मछलियां खुद को और दूसरी मछलियों को बेहतर तरीके से पहचान भी सकती हैं। वे एक-दूसरे के साथ सहयोग करती हैं। अध्ययन में पता चला कि इंसानों की तरह मछलियां भी स्वविकसित उपकरणों का इस्तेमाल करने में सक्षम होती हैं। अपने शोध के लिए बोनी मछली का अध्ययन करने वाले ब्राउन ने लिखा, ‘मछलियों का व्यावहारिक और ज्ञान संबंधी सुधार और उनमें दर्द की धारणा के विषय में मिले व्यापक सबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि किसी भी अन्य रीढ़ वाले प्राणी की तरह ही मछलियों को भी संरक्षण दिए जाने की जरूरत है।’

जर्नल एनिमल कॉग्निशन में प्रकाशित शोध के मुताबिक मछलियों की अब तक ज्ञात 32,000 प्रजातियां अन्य रीढ़ वाले प्राणियों की तुलना में कहीं ज्यादा हैं, लेकिन इनके संरक्षण की ओर आवश्यक ध्यान नहीं दिया गया है।

तनाव से घट सकती है स्मरण क्षमता

बिना वजह के तनाव से दूर रहिए, वरना समय से पहले ही आपकी स्मरण शक्ति कमजोर हो सकती है।  शोधकर्ताओं के अनुसार, तनाव पैदा करने वाले हार्मोन का स्तर अधिक होता है, वृद्धावस्था में उनके मस्तिष्क में रचनात्मक परिवर्तन और स्मरण शक्ति में अल्पकालिक कमी दिखाई पड़ता है।

चूहों पर किए गए इस शोध में शोधकर्ताओं ने अल्पकालिक स्मृति के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कोशिकाओं की जांच की। गौरतलब है कि चूहों में तनाव के लिए जिम्मेदार हार्मोन 'कॉर्टिकोस्टेरॉन' मानवों में पाए जाने वाले हार्मोन 'कॉर्टिसोल' के समान ही होता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार जिन चूहों में कॉर्टिकोस्टेरॉन का स्तर अधिक था, उनके प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की कोशिकाओं के बीच का संयोजन, अपेक्षाकृत कम कॉर्टिकोस्टेरॉन वाले चूहों से बेहद कम था। स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्राध्यापक रॉबर्ट सैपोस्की ने कहा, मष्तिस्क के प्रीफ्रंटल क्षेत्र में यह हार्मोन उम्र बढ़ाने वाले एक पेसमेकर की तरह काम कर सकता है।  सैपोस्की हालांकि इस शोध से जुड़े नहीं हैं। रैडली कहते हैं, अध्ययन से पता चलता है कि मष्तिस्क में इस हॉर्मोन का प्रभाव जैसा पहले समझा जाता था उससे कहीं ज्यादा पड़ता है।

खतरनाक बिच्छुओं के जहर से होगा मस्तिष्क कैंसर का इलाज!

मस्तिष्क कैंसर के इलाज में बिच्छू का विष कारगर साबित होगा. क्योंकि बिच्छू के जहर से बने 'ट्यूमर पेंट' के मानव परीक्षण के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से मंजूरी वैज्ञानिकों को मिल गई है। परीक्षण के पहले दौर में ट्यूमर पेंट का इस्तेमाल ग्लिओमा (मस्तिष्क या मेरुदंड का ट्यूमर) से पीड़ित 21 मरीजों पर होगा। इस उत्पाद का निर्माण अमेरिका की ब्लेज बायोसाइंस नाम की कंपनी ने किया है।

कैंसर कोशिकाओं की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने में ट्यूमर पेंट सहायता करेगा, जिससे न सिर्फ कैंसर का बेहतर तरीके से निदान हो सकेगा, बल्कि कैंसर की संपूर्ण और बेहतर सर्जरी भी संभव हो सकेगी। ट्यूमर पेंट का विकास इजरायल के खतरनाक बिच्छुओं के जहर से किया गया है। सिएटल चिल्ड्रंस हॉस्पिटल में मस्तिष्क कैंसर के विशेषज्ञ जिम ओस्लेन ने कहा कि ब्लड-ब्रेन बैरियर के कारण किसी भी अणु को मस्तिष्क तक पहुंचाना बेहद कठिन काम है। इसी को ध्यान में रखते हुए इसके विकास के लिए बिच्छू के जहर का विचार आया। 

सावधान! फलों और सब्जियों में है 140 प्रतिशत ज्यादा कीटनाशक

कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी (कट्स) ने जैविक खाद्य पदार्थों एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिये एक परिचर्चा का आयोजन किया। कट्स के निदेशक जॉर्ज चेरियन ने कहा कि फलों और सब्जियों में 140 प्रतिशत ज्यादा कीटनाशक पाये जाते है, आम लोगों को भी घरों में किचन गार्डन के माध्यम से जैविक खेती करनी चाहिए।
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक शीतल प्रसाद शर्मा ने बताया कि विभाग को जैविक खेती के लिये 125 करोड़ का सहयोग प्राप्त हुआ है। एकेएन यूनिवर्सिटी के रिसर्च निदेशक डा के रामाकृष्णा ने बताया कि जैविक खेती के लिये बहुत सारी तकनीकें अपनानी पड़ती हैं। आज बाजार में खाद्य पदार्थ उपलब्ध है उनमें अधिकतर में कीटनाशक एवं रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया गया है।

प्रेमियों के लिए बातचीत करने का सबसे बढ़िया जरिया है मोबाइल फोन

एक सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि आज के समय में प्रेमी युगलों के बीच जुड़े रहने का सबसे अच्छा संचार माध्यम मोबाइल फोन है और संचार के बाकी सभी माध्यम इससे पीछे हैं।
 जोड़ियां मिलाने वाली एक साइट शादी डॉट कॉम द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि 63 प्रतिशत अविवाहित भारतीय महिलाओं और 56 प्रतिशत अविवाहित पुरुषों ने माना है कि उनके रिश्ते को जीवंत बनाए रखने में देशव्यापी मोबाइल फोन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस सर्वेक्षण में केवल 25 प्रतिशत महिलाओं ने मिलने को और मात्र 12 प्रतिशत ने कंप्यूटर को रिश्तों की गर्माहटबनाए रखने के लिए विकल्प के तौर पर चुना।

इस सर्वेक्षण में यह भी जानने का प्रयास किया गया कि प्रेमी युगल वर्तमान में बातचीत के लिए किस माध्यम का प्रयोग करते हैं। तब 39 प्रतिशत महिलाओं ने मोबाइल फोन, 32 प्रतिशत ने मिलने-जुलने और 28 प्रतिशत ने कंप्यूटर को चुना।

इसी बात को जब अविवाहित पुरुषों से पूछा गया तब उनमें से 43 प्रतिशत ने मोबाइल फोन, 32 प्रतिशत ने कंप्यूटर और 25 प्रतिशत ने मिलने का विकल्प चुना। इस सर्वेक्षण में ‘फेसबुक’ और ‘व्हाट्सएप’ जैसे मोबाइन एप्स प्रेमी जोड़ों को सबसे ज्यादा पसंद आने वाले एप हैं।

शादी डॉट कॉम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीओओ) गौरव रक्षित ने कहा, ‘इस सर्वेक्षण में वर्तमान समय में रिश्तों में मोबाइल फोन की अहमियत सामने आई है।’

दुनिया में 74.8 करोड़ लोगों को मिलता है गंदा पानी: WHO

जेनेवा:  दुनिया में तकरीबन 74.8 करोड़ लोगों को नियमित रूप से साफ पानी नहीं मिल रहा है और करीब 18 लाख लोगों को दूषित पानी से अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रहीं हैं। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 लाख लोग सफाई के अभाव में रह रहे हैं और 100 करोड़ लोगों को खुले में शौच जाना पड़ रहा है, वहीं ग्रामीण इलाकों में हर 10 में से नौ लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं।
'ग्लास-2014' के नाम से जारी की गई इस रिपोर्ट में यह प्रमुख निष्कर्ष सामने आए हैं। यह अध्ययन हर दो साल में डब्ल्यूएचओ द्वारा कराया जाता है। इस अध्ययन के 2014 संस्करण को 'जल और स्वच्छता में निवेश, असमानता को कम करने, उपयोग में वृद्धि' नाम से जारी किया गया है। अध्ययन में बताया गया है कि पिछले दो दशकों में पीने के साफ पानी तक 23 लाख लोगों की पहुंच बढ़ी है।

इसी समय चक्र में डायरिया से मरने वाले बच्चों की मौत का कारण काफी हद तक स्वच्छता से जुड़ा हुआ था। 1990 में यह संख्या 15 लाख थी जो कि 2012 में घटकर छह लाख रह गई। डब्ल्यूएचओ में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग की निदेशक मारिया नेरा इन सुधारों की सराहना की, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी भी यह आंकड़ा काफी बड़ा है। अध्ययन में साफ-सफाई के महत्व पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा गया कि 75 फीसदी धनराशि का प्रयोग लोगों को पीने का स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए किया जा रहा है।

एजेंसी 

महिलाओं, बच्चों की सुरक्षा के लिए मोबाइल एप्प ‘जिमान’ लॉन्च

देश में महिलाओं, बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों को रोकने के लक्ष्य से एक आईटी कंपनी ने यहां ‘जिमान’ चौबीसों घंटे का वचरुअल प्रोटेक्टर नामक मोबाइल एप्प लॉन्च किया है।
एप्प विकसित करने वाली कंपनी के प्रबंध निदेशक प्रमोदी राव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, रोजाना बढ़ रहे आपराधिक घटनाओं के मद्देनजर जिकॉम इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटी सिस्टम्स लिमिटेड ने अनूठा मोबाइल एप्प विकसित किया है जो खतरे में पड़े पीड़ित को चौबीसों घंटे सेवा मुहैया कराने के अलावा परिजनों को भी खतरे की सूचना देगा।

एक प्रेस विज्ञप्ति में कंपनी ने दावा किया है कि आपात स्थिति के दौरान कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन का पावर बटन पांच बार दबाकर ‘जिमान’ को चालू कर सकता है। यह आपके कुछ चुनिंदा लोगों को संदेश भेजेगा और उनसे सहायता का अनुरोध करेगा। घटना के बाद भी ‘जिमान’ एक आपात नक्शा मुहैया कर आसपास की जरूरी सुविधाओं की सूची उपलब्ध कराएगा।

कुछ इस तरह से शरीर में फैलता है फेफड़े का कैंसर

फेफड़े के कैंसर के दौरान कैंसर कोशिकाएं किस प्रकार शरीर के अन्य भागों में फैलती हैं, इसका पता शोधकर्ताओं ने लगा लिया है। इसके लिए फेफड़े के कैंसर की कोशिकाएं सबसे पहले उस प्रोटीन को खत्म कर देती है, जो उसे पड़ोसी कोशिकाओं से जोड़े रखती है।

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के कैंसर रिसर्च यूके मैनचेस्टर इंस्टीट्यूट की प्रमुख शोधकर्ता एंगेलिकी मालिरी ने कहा, 'इस शोध में पहली बार यह बात सामने आई कि फेफड़े के कैंसर की कोशिकाएं किस प्रकार 'कोशिका पुनर्चक्रण प्रक्रिया' को कब्जे में कर पड़ोसी कोशिकाओं से अलग होती हैं।'

निष्कर्ष में खुलासा हुआ है कि कोशिकाओं को आपस में जोड़े रखने का काम एक प्रोटीन (टीआईएमए1) करता है। जब कोशिकाओं के मरम्मत की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी आती है, तो टीआईएमए1 को खत्म कर उस कोशिका को अलग कर दिया जाता है। बीमार कोशिकाओं की जगह स्वस्थ कोशिकाएं लेती रहती हैं। लेकिन फेफड़े के कैंसर की स्थिति में यह प्रक्रिया अनियंत्रित हो जाती है, जिसके परिणाम स्वरूप टीआईएमए1 भारी पैमाने पर नष्ट होती हैं और इस तरह कैंसर कोशिकाओं का प्रसार होता है।

रिसाइकिल की इस प्रक्रिया को नियंत्रित कर फेफड़े के कैंसर को फैलने से रोका जा सकता है। कैंसर रिसर्च यूके के नेल बैरी ने कहा, 'इस तरह की प्रारंभिक अवस्था का शोध इलाज की खोज के लिए बेहद जरूरी है और एक दिन ऐसा आएगा, जब कैंसर कोशिकाओं के प्रसार पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया जाएगा और कैंसर का स्थायी समाधान मिल जाएगा।' यह अध्ययन पत्रिका 'सेल रिपोर्ट्स' में प्रकाशित हुआ है।

आलू को सड़ने से बचाएगी नई तकनीक!

पंजाब के दोआबा इलाके में किसानों के लिए आलू की बंपर फसल अक्सर उनके लिए नुकसान दायक रही है। किसानों को नुकसान से बचाने की दिशा में जालंधर स्थित केंद्रीय आलू शोध स्टेशन ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे आलू को न केवल सड़ने से बचाया जा सकेगा बल्कि इसे लंबे समय तक भंडारण करके भी रखा जा सकेगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधीन केंद्रीय आलू शोध स्टेशन (सीपीआरएस) की तकनीक के तहत आलू को बिना खराब हुए आठ महीने तक भंडारण करके रखा जा सकता है।

इस तकनीक को विकसित करने वाले सीपीआरएस की प्रधान वैज्ञानिक डा आशिव मेहता ने इस बारे में बताया, ‘आलू में लगभग 80 फीसदी पानी की मात्रा होती है। यही कारण है कि मिट्टी से निकालने के कुछ ही हफ्ते बाद यह खराब होना शुरू हो जाता है।’ महिला वैज्ञानिक ने बताया, ‘अगर हम इस पानी को आलू से निकाल दें तो इसका जीवनकाल कुछ हफ्तों से बढ़कर आठ महीने तक हो सकता है और इतने समय तक इसे भंडारण करके भी रखा जा सकता है।’ सीपीआरएस के दो अन्य सहयोगियों के साथ इस तकनीक को विकसित करने वाली डा मेहता ने कहा, ‘हमने इस तकनीक का नाम ‘डिहाइड्रेशन आफ पोटैटो’ रखा है और यह पर्यावरण अनुकूल भी है।’

रात में महिलाएं और सुबह में पुरुष करना चाहते हैं सेक्स

महिलाओं और पुरुषों में यौनक्रीड़ा की इच्छा का समय अलग-अलग होता है। एक सर्वेक्षण से यह बात और स्पष्ट हो गई है कि महिलाओं में सोने से पहले रात के 11.21 बजे यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है। वहीं पुरुषों में सुबह के 7.54 बजे यौन संबंध बनाने की इच्छा होती है। सर्वेक्षण के शोध में पता चला है कि महिलाओं में रात के 11 बजे से दो बजे तक यौनसंबंध बनाने की इच्छा चरम पर होती है, जबकि पुरुषों में सुबह पांच बजे से नौ बजे तक यौन संबंध बनाने की इच्छा प्रबल होती है।


एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक पुरुष नाश्ते के पहले यौनसंबंध बनाने के लिए तैयार रहते हैं, जबकि महिलाएं रात के समय यौनसंबंध बनाना चाहती हैं। ब्रिटेन में 2,300 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण में यह भी निष्कर्ष निकला है कि लोग उस साथी के साथ घर बसाना चाहते हैं जिनमें यौन संबंध बनाने की समान प्रवृत्ति हो।

सेक्सटॉयज बनाने वाली कंपनी लवहनी द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में पता चला है कि 68 फीसदी महिलाओं और 63 फीसदी पुरुषों ने किसी ऐसे व्यक्ति से प्रेम संबंध बनाए हैं जिसकी यौन रुचि स्वयं की यौन रुचि से अलग थी। सर्वेक्षण में पता चला है कि पुरुषों में सुबह के समय यौनसंबंध बनाने की इच्छा प्रबल होती है, लेकिन इस दौरान मात्र 11 फीसदी महिलाओं में ही यौनसंबंधों की इच्छा होती है। वहीं सोने से पहले केवल 16 फीसदी पुरुष ही यौन संबंध बनाने के इच्छुक होते हैं।

स्मार्टफोन को 2 मिनट में चार्ज करने वाला चार्जर का ईजाद

इजरायल की एक नई कंपनी, स्टोरडॉट ने अत्यंत तीव्र गति वाला मोबाइल फोन चार्जर विकसित किया है, जो स्मार्टफोन की बैटरियों को मात्र दो मिनट में चार्ज कर सकता है।
हाल में लास वेगास में आयोजित 'कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो' में प्रदर्शित की गई बैटरियां थोड़ी कम अवधि तक चलती हैं, लेकिन इसकी खूबी यह है कि केवल दो मिनट चार्ज करने के बाद लगभग पांच घंटे तक चलती हैं।

कंपनी ने एक बयान में कहा, लेकिन बैटरी चूंकि दो मिनट में चार्ज हो जाती है, लिहाजा दिन में दो बार चार्ज कर लेने में कोई कठिनाई नहीं होगी। कंपनी ने एक प्रस्तुति के दौरान यह भी दिखाया कि तेल अवीव में प्रयोगशाला में विकसित की जा रही जैव कॉबर्निक चार्जर प्रणाली किसी स्मार्टफोन की बैटरी को मात्र 30 सेकेंड में ही चार्ज कर सकती है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डोरोन मायर्सडोर्फ ने कहा है, यह चार्जर, बैटरी प्रद्योगिकी को नए सिरे से विकसित करके तैयार किया गया है। इस बैटरी में होने वाली अभिक्रियाएं सामान्य बैटरी में होनी वाली अभिक्रियाओं से पूरी तरह भिन्न होती हैं, और इसमें खासतौर से तैयार किए गए कृत्रिम कॉर्बनिक अणु शामिल होते हैं।

अब कंप्यूटर में वेब ब्राउजर पर भी चलेगा व्हाट्सएप्प

लोकप्रिय मैसेजिंग एप्प व्हाट्सएप्प ने अपना वेब ब्राउजर संस्करण आज पेश किया। यानी अब यह एप्प पर्सनल कंप्यूटर आदि पर भी चलेगा। व्हाट्सएप्प ने एक ब्लॉग में लिखा है, ‘आज, पहली बार आप लाखों लोग अपने वेब ब्राउजर पर व्हाट्सएप्प चला सकेंगे।’

उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में 60 करोड़ से अधिक लोग व्हाट्सएप्प का इस्तेमाल करते हैं। अब तक यह एंड्रायड, आईओएस, विंडोज व ब्लैकबेरी जैसे आपरेटिंग सिस्टम वाले स्मार्टफोन पर ही काम करता है। इसके लिए ‘वेब डाट व्हाट्सएप्प डाट काम’ का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए फोन के भी इंटरनेट से जुड़ा रहना जरूरी है।

फेसबुक की तरह संपर्क साधती हैं मस्तिष्‍क की तंत्रिका कोशिकाएं

मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएं आपस में सोशल नेटवर्क की तरह गुथी हुई हैं। एक शोध निष्कर्ष में इसका खुलासा किया गया है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बसेल के शोधकर्ताओं का कहना है कि हर एक तंत्रिका कोशिका का संपर्क दूसरी तंत्रिका कोशिकाओं के साथ होता है, लेकिन कुछ तंत्रिका कोशिकाओं का आपस में घनिष्ठ संबंध होता है, जैसे फेसबुक पर लोगों का अपने दोस्तों के साथ होता है। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थॉमस मर्सिक-फ्लोगेल ने बताया कि मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं में भी एक तरह की प्रकृति वाली तंत्रिका कोशिकाओं के बीच घनिष्ठ और मजबूत संपर्क होता है, जबकि विपरीत या अलग प्रकृति वाली तंत्रिका कोशिकाओं के साथ कम या लगभग नहीं के बराबर संपर्क होता है।

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान मस्तिष्क के सेरेबरल कॉटेक्स का विशेष रूप से अध्ययन किया, जहां आंखों द्वारा सूचना प्रेषित होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह वैसा ही है, जैसा कि फेसबुक पर किसी इंसान के कई सारे दोस्त होते हैं, लेकिन किसी खास समूह के साथ ही उनका संपर्क मजबूत होता है।

गूगल ने रंगबिरंगा डूडल जारी कर मनाया होली का जश्‍न

 पूरे देश में होली की धूम है। लोग होली की मस्ती में झूम रहे हैं, ऐसे में भला गूगल कैसे पीछे रह सकता है। गूगल ने शुक्रवार को होली के त्यौहार पर रंगरंगीला डूडल जारी किया। गूगल के होम पेज पर शुक्रवार को होली के अवसर पर खास एनिमेशन दिखा।

इसमें गूगल के नाम पर विभिन्न प्रकार के रंग की फुहारें छोड़ते हुए दिखाया गया है। गूगल के इस डूडल में हरे, लाल, पीले, नारंगी और नीले रंगों के बीच सफेद रंग से गूगल लिखा हुआ नजर आ रहा है। यह सभी रंग फुहार के रूप में छूटते हुए दिख रहे हैं। गूगल के इस डूडल पर क्लिक करते ही होली से जुड़े पेज, और उससे संबंधित जानकारियों वाले पेज खुल रहे हैं। यह पांचवी वार है जब गूगल ने होली पर डूडल बनाया है। इससे पहले गूगल ने साल 2014 में भी डूडल के जरिये से होली का जश्न मनाया था।

सौर विमान पर विश्व परिक्रमा का मकसद स्वच्छ उर्जा के मामले में भारत का समर्थन

सौर उर्जा चालित विमान से विश्व परिक्रमा करने निकले स्विट्जरलैंड के पायलट बर्ट्रेंड पिकार्ड और आंद्रे बोर्शबर्ग चाहते हैं कि भारत के 1.2 अरब लोग वैश्विक पर्यावरण को बचाने के लिए नवीकरणीय उर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्येश्य वाले उनके अभियान का समर्थन करे।


पिछली रात मस्कट से अहमदाबाद की उड़ान में सोलर इंपल्स नामक अपने विमान को उड़ाने वाले पिकार्ड ने कहा ‘हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बिल्ले को हम पहन सकते हैं। हम अपने बाजू पर भारत का बिल्ला लगा सकते हैं।’ मनोचिकित्सक, पिकार्ड ने कहा कि सोलर इंपल्स 2 (एसआई2) परियोजना में प्रौद्योगिकी का नवोन्मेषन करने से लेकर इंजीनियरिंग और विभिन्न देशों की सरकार से अनुमति लेनी पड़ी।

सोलर इंपल्स 2 के डैनों में 17,000 से अधिक सौर सेल लगे हैं जो विमान की बैटरी को रिचार्ज करते हैं। यह करीब 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है। उन्होंने कहा कि विमान इसके बाद वाराणसी उड़ान भरेगा और प्रशांत महासागर पार करने से पहले 35,000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान चीन एवं म्यांमार समेत 12 जगहों पर रूकेगा।

अबुधाबी से मस्कट हो कर सफलतापूर्वक अहमदाबाद पहुंचे पिकार्ड ने कहा कि विश्व के सामने चिकित्सा अनुसंधान, गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण की रक्षा, बेहतर कामकाज और मानवाधिकार जैसी नयी चुनौतियां हैं और एसआई2 इन मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाना चाहता है। उन्होंने अपने अभियान को भारत की जनता से समर्थन मिलने की उम्मीद जताई और कहा ‘हमने अपनी वेबसाईट पर एक अभियान शुरू किया है। हमें 1.2 अरब लोगों से हस्ताक्षर मिल सकते हैं।’ बोर्शबर्ग इंजीयिनर हैं और शौकिया तौर पर सैनिक पायलट हैं। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय उर्जा के जरिए असंभव दिखने वाली चीजें की जा सकती हैं।

मंगल रोवर क्यूरॉसिटी ने रोबोटिक आर्म का इस्तेमाल फिर शुरू किया

नासा के अंतरिक्ष यान मंगल रोवर क्यूरियॉसिटी ने रोबोटिक आर्म का इस्तेमाल करना फिर से आरंभ कर दिया है। पिछले महीने इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण इस मिशन के वैज्ञानिकों को खुदाई संबंधी काम रोकना पड़ा था।


क्यूरॉसिटी ने बीते सप्ताह चट्टान के पाउडर को छानने और उसे संबंधित उपकरण के पास भेजने के लिए अपनी रोबोटिक आर्म का इस्तेमाल किया।

नासा ने कहा कि पिछले महीने शार्ट सर्किट के बाद मंगल ग्रह पर खुदाई के काम को रोक दिया गया था हालांकि इससे पहले नमूने एकत्र कर लिए गए थे। रोवर के भीतर मौजूद ‘केमिस्ट्री एंड मिनरलॉजी’ (केमिन) उपकरण ने चट्टान के पाउडर का नमूना हासिल किया है।

आईआरएनएसएस-1डी का श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण कल

भारत का दिशासूचक उपग्रह आईआरएनएसएस-1डी शनिवार को श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी27 के जरिए प्रक्षेपण के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह अमेरिका के जीपीएस की तर्ज पर भारत के लिए अपनी दिशासूचक प्रणाली का मार्ग प्रशस्त करेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने आज कहा कि यह प्रक्षेपण कल यहां से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से कल शाम पांच बजकर 19 मिनट पर होना है और इसकी 59.5 घंटे की उल्टी गिनती निर्बाध रूप से चल रही है।

इसरो के सूत्रों ने कहा कि कल सुबह पांच बजकर 49 मिनट पर शुरू हुई उल्टी गिनती निर्बाध रूप से आगे बढ़ रही है। चौथे चरण में नाइट्रोजन ऑक्सीडाइजर के मिश्रित ऑक्साइड भरने का काम पूरा हो चुका है।’’ पहले यह प्रक्षेपण नौ मार्च को होना था लेकिन टेलीमीट्री ट्रांसमीटर में एक खामी पाए जाने पर इसे स्थगित कर दिया गया था। आईआरएनएसएस-1डी, इसरो द्वारा भारतीय क्षेत्रीय दिशा सूचक उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) में स्थापित किए जाने वाले नियोजित सात उपग्रहों की श्रृंखला में चौथा उपग्रह है।

मोबाइल टावरों से स्वास्थ्य को खतरा नहीं'

केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने शुक्रवार को कहा कि यह सच नहीं है कि मोबाइल टावर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की रपटें इस बात की पुष्टि नहीं करती हैं।


राज्यसभा में पूछे गए अनुपूरक सवालों के जवाब में प्रसाद ने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निजी दूरसंचार कंपनियों से बात कर रही है।

कॉल कटने और अन्य समस्याओं पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसाद ने कहा, ''बुनियादी ढांचे के लिए हमें टावरों की जरूरत है। यदि हमें टावर लगाने की अनुमति नहीं है तो बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं हो सकता।''

प्रसाद ने राज्यसभा में कहा, ''अभी देश में एक अभियान चलाया जा रहा है कि मोबाइल टावरों से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। मैंने स्वयं इसकी जांच की है। मैं सदन के सामने इसके विषय में अधिक जानकारी रखूंगा। यह पूरा अभियान वास्तविक नहीं है।''

उन्होंने कहा, ''डब्लूएचओ की 30 रपटों का उचित अध्ययन किया गया है। मैंने इस पर अपनी समिति की स्थापना की है और मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि टावरों के लिए उचित बुनियादी ढांचों को मंजूरी दी जाएगी।''

प्रसाद ने यह भी कहा कि सरकार एमटीएनएल और बीएसएनएल के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर काम कर रही है और इस दिशा में कई नए टावर स्थापित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ''बीएसएनएल और एमटीएनएल की स्थिति ठीक नहीं है। जब तक निजी क्षेत्र मजबूत नहीं होगा तब तक प्रतिस्पर्धा को स्वस्थ नहीं बनाया जा सकेगा।'' उन्होंने कहा, ''बीएसएनएल 25,000 नए टावरों की स्थापना करेगा। एमटीएनएल दिल्ली और मुंबई में भी 800 से 900 टावरों का निर्माण करेगा।''

प्रसाद ने यह भी कहा कि ऐसी कुछ शक्तियां थीं, जिन्होंने एमटीएनएल और बीएसएनएल को बदहाल बनाए रखा।

उन्होंने कहा, ''2004 तक बीएसएनएल को 10,000 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। अब यह घाटे में क्यों है? यह सवाल जरूर उठाया जाना चाहिए। उस दौरान एमटीएनएल को 800 से 900 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। अब इसे घाटा क्यों हुआ? इन्हें अपना विकास करने की मंजूरी नहीं दी गई।''

नासा के मार्स रोवर ने मंगल ग्रह पर पूरे किये 11 साल

नासा का ऑपरच्युनिटी मार्स रोवर दूसरे ग्रह पर सबसे अधिक समय तक रहते हुए सबसे लंबी दूरी तय करने वाला पहला मानवनिर्मित यान बन गया है।


ऑपरच्युनिटी ने मंगल ग्रह के धरातल पर 26 मील यानी 42 किलोमीटर की दूरी 11 साल दो महीने में पूरी की। हालांकि वैज्ञानिकों को शुरूआत में इसके कुछ ही महीने तक काम करने की उम्मीद थी। सौर चालित रॉबोट जनवरी, 2011 को मंगल के इगल क्रेटर में उतरा था।

केलिफोर्निया में पासाडोना स्थित नासा के जेट प्रोपलशन प्रयोगशाला में ऑपरच्युनिटी के प्रबंध निदेशक जॉन कल्लास ने कहा, ‘यह पहली बार हुआ है कि किसी भी रोवर ने दूसरे ग्रह की सतह पर इतनी अधिक दूरी तय की।’

अपने मिशन के दौरान ऑपरच्युनिटी और उसके जुड़वे स्पिरिट ने पता लगाया कि मंगल पर कभी जलीय वातावरण था और कुछ हद तक जीवन के अनुकूल दशाएं थीं।

भारत ने आईआरएनएसएस-1डी का किया सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

भारत ने शनिवार को यहां से पीएसएलवी..सी27 के जरिये आईआरएनएसएस..1डी को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया, जिसके बाद देश स्वयं की नेवीगेशनल प्रणाली शुरू करने को तैयार है।


59.5 घंटे की उल्टी गिनती के समापन पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विश्वसनीय प्रक्षेपण यान पीएसएलवी.सी27 का यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शाम पांच बजकर 19 मिनट पर प्रक्षेपण हुआ। पीएसएलवी.सी27 ने प्रक्षेपण के 21 मिनट बाद उपग्रह को उसकी कक्षा में छोड़ दिया।

इसरो के अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने कहा कि मिशन सफल रहा और उपग्रह को सही कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। इसरो के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के बाद कुमार की यह पहली परियोजना थी।

कुमार ने कहा, ‘मैं पीएसएलवी के 28वें सफल मिशन के लिए इसरो की पूरी टीम को बधाई देता हूं जिसने आईआरएनएसएस..1डी को उसकी कक्षा में स्थापित किया जो कि नेवीगेशनल उपग्रह समूह का चौथा उपग्रह है।’

कुमार ने कहा कि पीएसएलवी ने यह दिखा दिया है कि पूर्व के उस प्रक्षेपण कार्यक्रम में बाधा आने के बावजूद उसने विकास की पराकाष्ठा प्राप्त कर ली है जिसे उसकी एक उप प्रणाली में समस्या आने के बाद नौ मार्च से आगे खिसका दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘हमने आज एक सफल प्रक्षेपण किया।’ इस प्रक्षेपण से देश इंडियन रीजनल नेविगेशनल सैटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) शुरू करने के लिए तैयार हैं क्योंकि भारत ने सात उपग्रहों के समूह में से चार उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित कर दिया है।

परियोजना निदेशक पी कुन्हीकृष्णन ने कहा, ‘यह मिशन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि हम नेविगेशनल प्रक्रिया शुरू करने के लिए कक्षा में चार उपग्रह की न्यूनतम जरूरत को पूरी कर रहे हैं।’ आईआरएनएसएस..1डी नेविगेशनल, ट्रैकिंग और मानचित्रण सेवा मुहैया कराएगा और इसका जीवन 10 वर्षों का होगा। इसरो ने आईआरएनएसएस गठन के लिए सात उपग्रहों के जिस समूह की योजना बनायी है उसमें आईआरएनएसएस..1डी चौथा होगा। एक बार सभी उपग्रह प्रक्षेपित होने के बाद आईआरएनएसएस अमेरिकी जीपीएस नेवीगेशनल प्रणाली के समकक्ष होगा।

चार उपग्रह आईआरएनएसएस का काम शुरू करने के लिए पर्याप्त होंगे, बाकी तीन उपग्रह उसे और सटीक एवं कुशल बनाएंगे। इसरो के एक और सफल प्रक्षेपण और इस वर्ष के उसके पहले मिशन के तहत 44.4 मीटर लंबा चार चरण वाला ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान 1425 किलोग्राम भार लेकर आकाश को चीरता हुआ अंतरिक्ष में रवाना हुआ। यान ने जैसे ही उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया, वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे। इस मिशन में पीएसएलवी के एक्सएल संस्करण का इस्तेमाल किया गया जो कि इस रॉकेट का 28वां सफल प्रक्षेपण था।

चंद्रयान.1, जीसैट.12, रिसैट.1, आईआरएनएसएस..1ए, मार्स आर्बिटर अंतरिक्षयान, आईआरएनएसएस.1बी और आईआरएनएसएस..1सी के बाद यह आठवीं बार था जब एक्सएल संस्करण का इस्तेमाल किया गया। आईआरएनएसएस प्रणाली को इस वर्ष तक पूरा करने की योजना बनायी गई है जिस पर कुल 1420 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह दक्षिण एशिया पर लक्षित होगा और इसे देश के साथ ही उसकी सीमा से 1500 किलोमीटर तक के उपयोगकर्ताओं को सटीक स्थिति की सूचना मुहैया कराने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके जरिये स्थलीय और समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग और बेड़ा प्रबंधन, पर्वतारोहियों और यात्रियों के लिए दिशासूचक सहायता तथा गोताखोरों के लिए दृश्य एवं आवाज नेविगेशन सुविधा मुहैया करायी जाएगी।

आईआरएनएसएस श्रृंखला के पहले तीन उपग्रहों का प्रक्षेपण क्रमश: एक जुलाई 2013, पिछले वर्ष चार अप्रैल और 16 अक्तूबर को किया गया था। आईआरएनएसएस प्रणाली दो तरह की सेवाएं मुहैया कराएगा जिसमें एक मानक पोजीशनिंग सेवा जो कि सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी तथा सीमित सेवा जो कूट सेवा होगी एवं केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ही मुहैया होगी।

किरण कुमार ने इसके साथ ही गांधी शांति पुरस्कार प्राप्त करने के लिए इसरो की पूरी टीम को बधाई दी।

उन्होंने कहा, ‘इसरो दशकों से जो काम कर रहा है, यह उसका वास्तव में बड़ा सम्मान है..मैं पूरे देश, सरकार, प्रधानमंत्री और कैबिनेट के सभी सदस्यों को इसरो में विश्वास जताने तथा समाज की भलाई के लिए उसके योगदान को सम्मानित करने के लिए धन्यवाद देता हू।’

चीटियों को भी लगा जंक फूड का चस्का

अगर आपको लगता है कि डिब्बाबंद खाद्य पदार्थो (जंक फूड) की दीवानी केवल युवा पीढ़ी ही है, तो आप मुगालते में हैं। शहरी परिवेश में रहने वाली चीटियों की कुछ प्रजातियां भी इस तरह के खाद्य पदार्थों की दीवानी हैं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।


इस निष्कर्ष से उस जिज्ञासा का उत्तर मिलता है कि चीटियों की कुछ प्रजातियां केवल शहरी परिवेश में ही ज्यादातर क्यों पाई जाती हैं। निष्कर्ष के लिए चीटियों के शरीर में आइसोटोप स्तर का अध्ययन किया गया। अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्टेट युनिवर्सिटी के मुख्य लेखक क्लिंट पेनिक ने कहा, 'हम इस बात का पता लगाना चाहते थे कि चीटियों की कुछ प्रजातियां क्यों हमारे आस-पास ही पाई जाती हैं, जबकि कुछ प्रजातियां इससे इतर मानवीय गतिविधियों से दूर वाले इलाकों में रहना पसंद करती हैं।'

अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 21 प्रजातियों की 100 चीटियों पर यह अध्ययन किया, जिन्हें मैनहप्तन से फुटपाथों, पार्को व अन्य जगहों से एकत्रित किया गया। उन्होंने कहा, 'शहरी प्रजाति की चीटियों के आहार वही होते हैं, जो वहां के मानवों के आहार हैं।'

मानव सहित लगभग सभी पशु अपने भोजन के रूप में कार्बन ग्रहण करते हैं। कार्बन की ही एक किस्म सी13 मक्का व गन्ने जैसी घासों से संबंधित है। चूंकि, लगभग सभी जंक फूड में मक्का तथा शर्करा मौजूद होते हैं। इसलिए सी13 उन सभी चीटियों में पाए जाते हैं, जो मानव आहार को ग्रहण करते हैं। दूसरी ओर मानव आहार ग्रहण न करने वाली चीटियों में सी13 नहीं पाया जाता।

अब स्मार्टफोन खोलेगा आपके घर का ताला

र आपकी चाबियां गुम हो जाती हैं या आप कई चाबियां साथ लेकर नहीं चलना चाहते तो अब आप अपने स्मार्टफोन में का इस्तेमाल कर अपने घर के दरवाजे पर लगा ताला खोल सकते हैं। स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच के बाद अब स्मार्टलॉक आपके घर की सुरक्षा करेगा। स्मार्टलॉक को ऑगस्टा नाम की कंपनी ने बनाया है। इसके लिए आपको अपने स्मार्टफोन में एक एप डाउनलोड करना होगा।


इस ताले को सिर्फ वही खोल सकेंगे जो इसके मोबाइल एप में रजिस्टर्ड होंगे। यानी इस एप में रजिस्टर्ड आपके परिवार का कोई अन्य सदस्य भी अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर इस ताले को खोल सकता है। इस एप में एक खास कोड डालना होता है, जो सिर्फ एक ही व्यक्ति जनरेट कर सकता है।

ऑगस्टा द्वारा बनाए गए इस ताले की कीमत है 250 अमेरिकी डॉलर और इसके एप को इंस्टाल करने के लिए अलग से इतनी ही राशि और देनी होगी। मान लीजिए घर के 4 लोगों ने 'ऑगस्टा' लॉक एप्लीकेशन डाउनलोड कर लिया मगर वो तभी एप की मदद से लॉक खोल सकेंगे जब एप में वे खास कोड डालेंगे।

यहां तक कि आप कोड की समय-सीमा भी सेट कर सकते हैं। समय-सीमा खत्म होने पर अपने आप अन्य सदस्यों के पास से लॉक कोड एक्सेस खत्म हो जाएगा। वैसे सुनने में यह भले ही काफी आकर्षक लग रहा हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसको लेकर खास उत्साहित नहीं हैं। वजह? मोबाइल फोन हैक भी तो किए जा सकते हैं। अगर आपका स्मार्टफोन एक बार हैक हो जाए तो आप अपने घर का ताला कैसे खोल पाएंगे? ऐसी स्थिति में कोई दूसरा उपाय करना होगा या बाहर ही रहना होगा।

उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं हो रहा है ब्रह्मांड का विस्तार

वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्रह्मांड का विस्तार उतनी तेजी से नहीं हो रहा है जैसा पहले माना जाता था।


एरिजोना विश्वविद्यालय की अगुवाई वाले खगोलविदों की एक टीम के अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि ब्रह्मांड का तेज गति का विस्तार उतना तेजी से नहीं हुआ है जिसकी बातें पुस्तकों में की गई है। इस टीम की अगुवाई पीटर ए मिल्ने कर रहे थे।

Saturday, May 2, 2015

वायुमंडल में कार्बन डाय-ऑक्साइड के प्रदूषण से जल्द मिलेगी मुक्ति!

एक ऐसे समय में जब दुनियाभर के नेता वैश्विक तापमान में इजाफा, ऊर्जा संकट और घटते संसाधन से निबटने के लिए चर्चा कर रहे हैं, आईआईटी दिल्ली के छात्रों के एक समूह ने पारिस्थितिकी के तीनों मुद्दों का एकल समाधान निकालने का प्रयास किया है।

आईआईटी दिल्ली के छात्रों की इस परियोजना में एक समस्या के कारण को अन्य दो के हल की कुंजी में बदला जाता है। इसे शनिवार को यहां इंस्टीट्यूट में आयोजित 11वें आईआईटी ओपन हाउस में प्रदर्शित किया जाएगा। वायुमंडल में कार्बन डायक्साइड के स्तर में इजाफा वैश्विक तापमान में इजाफे का एक प्रमुख कारण है। इसने इस गैस के उत्पादन में कमी लाने और इस पर नियंत्रण स्थापित करने की जरूरत बढ़ा दी है।

आईआईटी दिल्ली के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर अनिल वर्मा के नेतृत्व में एक अनुसंधान समूह ने हवा में प्रदूषणकारी गैस की ना सिर्फ मात्रा कम करने, बल्कि उसे अनेक मूल्यवान उत्पादों में बदलने की भी कोशिश की है। वर्मा कहते हैं, ‘हम कार्बन डायक्साइड के विद्युत-रासायनिक रूपांतरण में लगे हैं और पाया है कि कार्बन डायक्साइड का उपयोग मीथेन और अन्य मूल्यवान उत्पादों के उत्पादन में किया जा सकता है।’

मीथेन में कार्बन डायक्साइड का रूपांतरण सौर या पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर किया जा रहा है। वर्मा बताते हैं कि पारंपरिक रूप से रूपांतरण के दौरान गैस किसी घोलक में घोली जाती है। उनकी टीम ने दूसरा रास्ता अपनाया है। उन्होंने सीधे संयंत्र में गैस का उपयोग किया है जहां उसे मीथेन और फार्मिक अम्ल जैसे कुछ अन्य उत्पादों में बदला जाता है।’

जलवायु परिवर्तन पर भारत से कोई मतभिन्नता नहीं: अमेरिका

अमेरिका ने सोमवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के साथ कोई मतभिन्नता नहीं है और वह भारत का सर्वश्रेष्ठ साझेदार होना चाहेगा। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया था कि देश इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव में नहीं आएगा।


पेरिस में इस साल के आखिर में संयुक्त राष्ट्र की जलवायु वार्ता से पहले अमेरिका ने कहा कि भारतीय उद्योगों के लिए जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नेतृत्व करने के अवसर हैं क्योंकि यहां किये जाने वाले अभिनव प्रयोग वैश्विक समुदाय के लिए आकर्षक होंगे। ये अधिक बेहतर, स्वच्छ, सार्थक और लाभदायक होंगे।

भारत में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा, ‘चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्मार्ट सिटीज, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रमों को लागू करना चाहते हैं और 175 गीगावाट स्वच्छ, अक्षय ऊर्जा 2022 तक हासिल करने के लक्ष्य पर काम करना चाहते हैं, इसलिए स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करने के अनगिनत अवसर होंगे।’ वह जलवायु संबंधी कार्रवाइयों से जुड़े आर्थिक अवसरों को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम ‘क्लाइमेट पार्टनर्स’ की शुरूआत करते हुए अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

ग्रीनहाउस गैस ‘हाइड्रोफ्लोरोकार्बन’ को चरणबद्ध तरीके से कम करने के भारत के हालिया प्रस्ताव का स्वागत करते हुए अमेरिका ने कहा कि वह भारत का ‘सर्वश्रेष्ठ साझेदार’ होने का इच्छुक है और कम कार्बन उत्सर्जन और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य की ओर अंतरण को बढ़ावा देने के तरीकों पर मिलकर काम कर रहा है। वर्मा ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में किस तरह का नेतृत्व देना चाहता है, अमेरिका उसे समझता है। उन्होंने कहा, ‘हमें 1990 के दशक की शुरुआत की दुनिया से आगे निकलने की जरूरत है जो दो खेमों में बंटी हुई थी। अब हम दो खेमों में नहीं बंटे हैं। ’ वर्मा ने कहा कि भारत की ओर न केवल अमेरिका बल्कि दुनिया देख रही है और उसे जलवायु परिवर्तन पर अहम भूमिका निभानी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि भारत को जलवायु परिवर्तन पर विकसित देशों द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और इसके बजाय जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भारत को दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए। वर्मा ने कहा कि अमेरिका ने साल 2025 तक उत्सर्जन 28 प्रतिशत तक कम करने की प्रतिबद्धता के साथ ‘इंटेंडेड नेशनली डिटरमाइन्ड कंट्रीब्यूशन’ (आईएनडीसी) पहले ही दे दिया है।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, नए अवतार में आएगा सेब

जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान बढ़ रहा है और बर्फबारी में कमी आ रही है। ऐसे में आप जो सेब खाते हैं उसका स्वाद बदल सकता है। अब उत्पादक सेब की ऐसी किस्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो बदलते मौसम के अनुरूप पैदा किया जा सके।हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के कम उंचाई वाले इलाकों में कम ठंडक में और जल्द पकने वाली सेब के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। वहीं परंपरागत सेब का उत्पादन अब अधिक उंचाई वाले क्षेत्रों को स्थानांतरित हो रहा है।

हिमाचल के सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा, कम उंचाई वाले 4,000 फुट तक के क्षेत्रों में परंपरागत किस्मों का उत्पादन जलवायु परिवर्तन व अचानक बदलने वाली मौसम की परिस्थितियों की वजह से मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में पिछले एक-दो साल में हम नई किस्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सिंह के पास शिमला के कोटगढ़ में सेबों का बागान है। उन्होंने कहा कि नई किस्मों का स्वाद भिन्न है, लेकिन ये भारतीय उपभोक्ताओं के हिसाब से अच्छी हैं। कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि कम ठंडक वाली किस्मों मसलन ‘माइकल’, ‘ट्रापिकल ब्यूटी’, ‘स्कूलमेट’ आदि का उत्पादन किसानों के लिए अच्छा है।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में केंद्रीय तापमान बागवानी संस्थान (सीआईटीएच) के निदेशक डॉ नजीर अहमद ने कहा, सेब का उत्पादन धीरे-धीरे उंचे स्थानों की ओर स्थानांतरित होने के बीच हमें ऐसी किस्मों की जरूरत है, जो जल्दी पक सके और जिन्हें ठंडक के तापमान की कम जरूरत हो। मौसम के रिकॉर्ड को देखने के बाद पता चलता है कि अब सर्दियां पिछले दो तीन दशक की तुलना में अधिक गर्म होती हैं।

जापान की मैग्‍लेव ट्रेन ने बनाया स्‍पीड का नया रिकॉर्ड, 603 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ी

हाईस्पीड ट्रेनों के लिए मशहूर जापान में एक बार फिर ट्रेनों की सर्वाधिक स्‍पीड दर्ज की गई है। जापान की नवीनतम प्रणाली से युक्‍त मैग्‍लोव ट्रेन ने मंगलवार को स्‍पीड का नया रिकार्ड बनाया है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को माउंट फूजी के निकट हुए टेस्‍ट रन में इस ट्रेन ने 600 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार पकड़ी।

सेंट्रल जापान रेलवे के अनुसार, मैग्लेव ट्रेन ने 603 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़कर सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और करीब 11 सेकेंड तक यह ट्रेन 600kph की रफ्तार से चलती रही। विद्युत चुंबक की मदद से चलने वाली इस ट्रेन का टेस्ट रन टोक्यो के दक्षिण में माउंट फिजी के पास किया गया।

मैग्‍लोव ट्रेन ने करीब एक सप्‍ताह पहले बनाए अपने रिकार्ड में ही सुधार किया है। एक सप्‍ताह पहले इस ट्रेन ने 590kph की रफ्तार दर्ज की थी। गौर हो कि इससे पहले 2003 में जापानी मैग्लेव ट्रेन 581 किमी प्रति घंटा (361 मील प्रति घंटा) से दौड़ी थी। बताया गया कि टेस्ट रन के दौरान मैग्लेव ने महज 1.8 किमी की दूरी में ही 600 किमी प्रति घंटा की रफ्तार हासिल कर ली थी। वैसे भी जापान की हाई स्पीड ट्रेन सर्विस दुनिया की सबसे उन्‍नत टेक्नोलॉजी से युक्‍त है। जापान अब 410 किमी (250 मील) लिंक पर इसके प्रयोग के लिए तकनीक को विकसित कर रहा है। इसके जरिये टोक्यो से ओसाका तक की दूरी को सिर्फ एक घंटे में पूरा कर लिया जाएगा। अभी बुलेट ट्रेन के जरिये इस दूरी को तय करने में तीन घंटे का समय लगता है।

जापान रेलवे सेंट्रल की चाहत है कि साल 2027 तक यह ट्रेन पूरी तरह सर्विस में आ जाए और टोक्‍यो एवं नगोया के बीच की 286 किलोमीटर की दूरी को तय किया जा सके।

फेसबुक एप 'हैलो' बताएगा कॉलर की पहचान

फेसबुक ने एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए एक नया कॉलर आईडी एप लांच किया है। यह फेसबुक डाटा का इस्तेमाल फोन कौन कर रहा है, यह पता लगाने और अनचाही कॉल ब्लॉक करने में मदद करने के लिए करेगा।



इस एप का नाम 'हैलो' है। यह फेसबुक प्रोफाइल से इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल के फोन नंबरों को मैच कर आपको दिखाता है कि आप किस से बात कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह कॉमन रूप से ब्लॉक किए गए फोन नंबरों से आने वाली कॉल को भी ब्लॉक करता है।

यह फेसबुक फीचर केवल तभी काम करेगा, जब कॉलर ने अपना फोन नंबर फेसबुक के साथ शेयर किया हो और आप उसे देख पाने में समर्थ हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपने फेसबुक पर अपना नंबर सार्वजनिक रूप से शेयर किया है, तो हैलो एप वाले शख्स को पता चल जाएगा कि उसे फोन आप कर रहे हैं, भले ही उनके पास आपका नंबर कांटेक्ट के रूप में सेव न हो।

एक बार एप डाउनलोड होने के साथ ही आप फेसबुक पर साइन इन करते हैं और इसे अपने कांटेक्ट नंबर फेसबुक के साथ सिंक(जोड़ने)करने और कॉल से जुड़ने की इजाजत दे देते हैं। यह एप फेसबुक की मैसेंजर टीम ने बनाया है। इसके तहत एप उपयोगकर्ता को जब कॉल आती है, तो यह कॉल करने वाले व्यक्ति की जानकारी दर्शाता है। फिर चाहे वह नंबर उस उपयोगकर्ता के फोन में सेव भी न हो। हैलो का काम करने का तरीका काफी हद तक एक अन्य कॉलर आईडी एप 'ट्रकॉलर' से मिलता-जुलता है।

बुध ग्रह पर टकराया नासा का अंतरिक्षयान, खत्म हुआ 11 साल का अभियान

नासा का अंतरिक्षयान मैसेंजर बुध ग्रह की सतह पर क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके कारण इसके ऐतिहासिक 11 वर्षीय अभियान का अंत हो गया। इस अभियान ने ग्रह के बारे में महत्वपूर्ण आंकड़े और इसकी हजारों तस्वीरें उपलब्ध करवाई थीं।


मेरीलैंड स्थित जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी अप्लाइड फीजिक्स लेबोरेट्री में इस अभियान के नियंत्रणकर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि मैसेंजर (मरकरी सरफेस, स्पेस एनवायरमेंट, जियोकेमिस्ट्री एंड रेंजिंग) नामक अंतरिक्ष यान भविष्यवाणी के मुताबिक गुरूवार को बुध की सतह से टकरा गया।

मैसेंजर को तीन अगस्त 2004 को प्रक्षेपित किया गया था और इसने 18 मार्च 2011 को बुध की कक्षा में घूमना शुरू किया था। इस अंतरिक्षयान ने मार्च 2012 तक अपने प्राथमिक वैज्ञानिक लक्ष्यों को पूरा कर लिया था।

चूंकि मैसेंजर की शुरूआती खोजों ने कुछ नए एवं महत्वपूर्ण सवाल उठाए थे और पेलोड भी अच्छी स्थिति में था, इसलिए इस अभियान को दो बार विस्तार दिया गया था। इस अंतरिक्षयान ने बेहद कम उंचाई से अवलोकन करने, तस्वीरें खींचने और ग्रह के बारे में अभूतपूर्व जानकारी जुटाने के काम को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

पिछले माह जब इस अभियान को एक अंतिम लेकिन अल्पकालीन विस्तार दिया गया। इस दौरान अंतरिक्षयान ने ग्रह के बेहद करीब यानी सतह से महज 5 से 35 किलोमीटर की उंचाई के बीच काम किया।

28 अप्रैल को इस टीम ने सात कक्षकों के पथ संशोधन के कार्य के तहत अंतिम संशोधन को भी सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया था। इसके लिए मैसेंजर को एक अतिरिक्त माह के लिए हवा में रहना पड़ा था। यह अवधि महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने वाले किसी अंतरिक्ष यान के यंत्रों के लिए काफी ज्यादा थी।

अंतत: मैसेंजर सूर्य के गुरूत्वीय खिंचाव के कारण अपने कक्षक में होने वाले विचलन का सामना नहीं कर सका और 8750 मील प्रति घंटा की गति से बुध की सतह से टकरा गया। इसके कारण 52 फुट गहरा एक नया गड्ढा वहां सतह पर बन गया।

मैसेंजर के प्रमुख जांचकर्ता और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लेमंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के निदेशक सीन सोलोमन ने कहा, ‘आज हम हमारे पड़ोसी ग्रहों के बारे में खोज करने वाले सबसे अधिक प्रवीण अंतरिक्षयानों में से एक यान को विदा दे रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हमारे यान ने सूर्य के निकटतम ग्रह के कक्षक में चार साल से भी ज्यादा समय बिताया और वहां की अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक विकिरण को भी सहा।’ मैसेंजर की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने बताया, ‘इसने बुध की सतह की संरचना का पता लगाया। इसके भौगोलिक इतिहास को उजागर किया और यह भी खोज की कि इसका आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र ग्रह के केंद्र से लंबवत दूरी पर है।’

एजेंसी

BSNL ने रोमिंग कॉल दरों में 40% तक कटौती की

सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने अपने प्रीपेड और पोस्टपेड उपभोक्ताओं के लिए रोमिंग कॉल की दरों में 40 प्रतिशत तक की कटौती की है। नयी दरें एक मई से प्रभावी हो गयी हैं।


बीएसएनएल ने एक विज्ञप्ति में कहा कि दूरसंचार नियामक ट्राई के आदेश का पालन करते हुए उसने रोमिंग दरें कम कर दी हैं। विज्ञप्ति के अनुसार रोमिंग में आने वाली फोन कॉल दर 40 प्रतिशत, एसटीडी 23 प्रतिशत और स्थानीय फोन कॉल की दर 20 प्रतिशत कम कर दी गयी है। इसी प्रकार रोमिंग में राष्ट्रीय एसएमएस सेवा की दर में 75 प्रतिशत की कटौती की गयी है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बीएसएनएल ने अपने लैंडलाइन धारकों को रात नौ बजे से सुबह सात बजे तक असीमित मुफ्त काल कराने की सुविधा दी है। जो पहली मई से लागू है।

आपकी हथेलियां बदलेंगी आपका मूड

एक नई प्रौद्योगिकी के जरिए हाथ के विभिन्न हिस्सों से आप में खुशी, दुख, रोमांच या डर के अहसास का संचार किया जा सकता है. वह भी बिना आपको छूए.
ससेक्स विश्वविद्यालय के सूचना विज्ञान विभाग की मारियाना ओब्रिस्ट के अनुसार, अंगूठे, तर्जनी और हथेली के बीच में बेहद थोड़े समय के लिए हवा के तेज धक्कों की मदद से किसी व्यक्ति में रोमांच का अहसास पैदा किया जा सकता है, जबकि धीमे एवं मध्यम दबाव वाले वायु के झोकों की मदद से किसी में दुख के भाव जगाए जा सकते हैं.

मारियाना एक उदाहरण देते हुए कहती हैं कि पत्नी अपने ऑफिस पहुंचकर बैठक में जाती है और इसी दौरान उसकी कलाई पर लगी ब्रेसलेट के जरिए उसकी हथेली के मध्य हिस्से में रोमांचकारी अहसास पैदा किया जा सकता है. इस अहसास से न सिर्फ उसे आराम मिलेगा बल्कि उसे यह भी अहसास होगा कि उसका पति उससे नाराज नहीं है.


परीक्षण के दौरान अल्ट्राहैप्टिक्स प्रणाली के जरिए यह अहसास पैदा किया गया. यह प्रणाली हवा के जरिए हथेली के विभिन्न हिस्सों में छूने से होने वाले अहसास को पैदा करती है.

विभिन्न अहसासों के लिए स्टिमुलेशन पैटर्न का प्रतिभागियों के तीन विभिन्न समूहों पर परीक्षण किया गया. शोधकर्ता के अनुसार, इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल एक-दूसरे से दूर रहने वालों के बीच संचार को और जीवंत बनाने के लिए किया जा सकता है.

मेकअप किट के लिए 500 रुपये से कम दाम के 11 ब्यूटी प्रोडक्ट, रखें आपके बजट का ख्याल

मेकअप किट के लिए 500 रुपये से कम दाम के 11 ब्यूटी प्रोडक्ट, जो रखें आपके बजट का ख्याल...

1. मेबेलीन कोलोसल काजल
मेबेलीन काजल लड़कियों के लिए सबसे अच्छी चीजों में से एक है. कोई भी महिला बिना उसके अपने मेकअप किट की कल्पना नहीं कर सकती है. ये एक ऐसा सौंदर्य उत्पाद है जो आपके बजट में आसानी से आ जाता है. ये काजल 12 घंटे तक आंखों में बना रहता है और उन्हें बोल्ड और सुंदर लुक देता है. इसका मूल्य सिर्फ 199 रुपये है और आप इसको ऑनलाइन और सस्ती कीमत में पा सकती हैं.

2. मेबेलीन के आई स्टूडियो लास्टिंग ड्रामा जेल लाइनर
मेबेलीन का ये लाइनर लंबे समय तक आंखों में टिका रहता है. ये वाटरप्रूफ होता और आंखों को ग्लैमरस लूक देता है. ये 24 घंटे तक बना रहता है. ये उन महिलाओं के लिए भी बेहद सुरक्षित है जो लेंस लगाती है और ये नेत्र रोग विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण किया हुआ है. इसकी कीमत सिर्फ 475 रुपये है.

3. न्यूट्रोगेना डीप क्लीन ब्लैकहैड एलिमिनटिंग स्क्रब
हम सभी आमतौर पर ब्लैकहैड की समस्या से जूझते हैं. न्यूट्रोगेना ब्लैकहैड की गहरी साफाई करता है और ब्लैकहैड को पूरी तरह से खत्म करता है. ये चिकनी त्वचा के ब्लैकहैड भी आसानी से निकालता है. ये ब्लैकहैड को दोबारा आने से रोकता भी है. इसका मूल्य सिर्फ 129 रुपये है, जो आपकी बजट में होगा.

4. लोटस हर्बल वाइटग्लो स्किन वाइटनिंग एंड ब्राइटनिंग जेल क्रीम
प्राकृतिक रूप से बने इस क्रीम से घातक पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा होती है. इसमें एसपीएफ 25 है. इसे आप ऑनलाइन सस्ते मूल्य पर खरीद सकती हैं. इसका मूल्य 325 रुपये है.

5. लक्मे अबसोलुट व्हाइट इंटेंस कंसीलर
इसमें मॉइस्चराइजिंग तत्व शामिल होने के कारण ये आपकी त्वचा को ड्राई होने से बचाती है. इसमें एसपीएफ 20 और विटामिन बी 3 में शामिल है. ये तेलीय त्वचा वालों के लिए अच्छा विकल्प है. ये सिर्फ 450 रुपए में पाया जाता है.

6. मेबेलीन ड्रीम लुमी टच कंसीलर
ये एक छोटे स्पंज टिप एप्लीकेटर के रूप में आता है. ये गाल और आँखों के नीचे दोनों पर अच्छी तरह से काम करता है और काले घेरे, काले धब्बे और मुँहासों के निशान को ढकता है. वैसे तो इसका मूल्य 500 रुपये है पर आप इसे ऑनलाइन सिर्फ 399 रुपये में खरीद सकती है.

7. कोलोर्बर क्रीम टच लिपस्टिक
कोलोर्बर क्रीम टच लिपस्टिक शीबटर, विटामिन ई और एसपीएफ 15 से समृद्ध हैं. ये 40 से अधिक रंगों में पाया जाता है. ये 475 रुपये में पाया जाता है.

8. कोलोर्बर टच एंड ब्लश
ये गालों को अच्छे से हाईलाइट करता है और एक पेशेवर मेकअप लूक देता है. ये चार रंगों में उपलब्ध है और एक स्पंज एप्लीकेटर के साथ आता है. ये विटामिन ई से समृद्ध हो
ता है और लंबे समय तक टीका रहता है. ये सिर्फ 499 रुपये में उपलब्ध है.

9. मेबेलीन कलर टैटू आई शैडो
आँखों को ग्लॉसी लूक देने के लिए मेबेलीन कलर टैटू आई शैडो का इस्तेमाल किया जाता है. ये पिंक, ब्रोंज़े और गोल्डन रंगों में उपलब्ध है. इसका मूल्य सिर्फ 350 रुपये है.

10. रेवलॉन कलरस्टे आई शैडो
आँखों के मेकअप की बात कर रहे है तो रेवलॉन कलरस्टे आई शैडो का उल्लेख करना जरूरी है. ये आँखों में 12 घंटे तक बना रहता है. ये सिर्फ 195 रुपये में उपलब्ध है.

11. लोरियल टोटल रिपेयर 5 हेयर मॉसक्यू
आपके प्यारे लूक का एक आवश्यक हिस्सा आपके बाल भी हैं, फिर आप कैसे बालों की देखभाल को अनदेखी कर सकती हैं. लोरियल टोटल रिपेयर 5 हेयर मॉसक्यू एक उत्कृष्ट कंडीशनर है और बालों को ग्लैमरश लूक देती है. ये बालों की मरम्मत करता है और बालों को गिरने और ड्राई जैसी समस्याओं से छूटकारा दिलाता है. इसे आप सिर्फ 300 रुपये में खरीद सकती हैं.

ऑयली स्किन के लिए ब्यूटी टिप्स

ग्लोइंग स्किन पाना किसकी ख्वाहिश नहीं होती, लेकिन हममें से ज्‍यादातर लोग अपनी स्किन का ठीक से ध्‍यान नहीं रखते हैं. और कुछ लोग तो तब तक इंतजार करते है जब तक स्किन पूरी तरह से खराब नहीं हो जाती. धूल, धुएं और प्रदूषण से हमारी स्किन को नुकसान पहुंचता है. स्किन की देखभाल के लिए और पिंगमेंटेशन, सेंसिटिविटी और एंटी एजिंग जैसी समस्याओं से बचने के लिए आप थोड़ा सा समय निकाल कर रेग्‍युलर स्किन केयर रूटीन को अपना सकते हैं.
ग्लोइंग स्किन आप भी पा सकते हैं बस जरूरत है आपको रोजाना ये स्टेप्स फॉलो करने की:

क्‍लींजिंग: अपना चेहरा साफ करने के लिए आप नारियल पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. क्‍लींजिंग के बाद स्किन के पोर्स बंद करने के लिए अल्कोहल फ्री टोनर का इस्तेमाल करना चाहिए.


मॉइश्चराइजर: मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल सर्दियों और गर्मियों दोनों में करना चाहिए. अगर आपकी ऑयली स्किन है तो आपको वॉटर बेस्ड जेल और मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए. चेहरे को ठंडे पानी से धोएं. इससे आपके चेहरे का तापमान सही रहेगा, चेहरे पर ऑयल कम आएगा और मुहांसे भी नहीं होंगे.

सनस्क्रीन: सनस्‍क्रीन लोशन लगाना कभी ना भूलें. भारतीय स्किन के हिसाब से SPF 20 सबसे अच्छा रहता है. UVA प्रोटेक्शन वाला सनस्क्रीन नॉर्मल स्किन के लिए खासा फायदेमंद है. अगर आपकी सेंसिटिव स्किन है तो सनब्लॉक UVB प्रोटेक्शन वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल कर सकते हैं.

गोरा होने के लिए लगाते हैं क्रीम, तो हो जाएं सावधान!

आजकल कुछ लोग ऐसी स्किन क्रीम का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें पारा पाया जाता है. लोग इन क्रीम को चेहरे पर लगाते हैं या इंजेक्शन से त्वचा के अंदर भी पहुंचाते हैं ताकि अपनी त्वचा को गोरा बना सकें, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि पारा युक्त क्रीम के प्रयोग से गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि अब लोग पारायुक्त क्रीमों की पहले से कहीं अधिक तेजी से पहचान कर सकते हैं. कैलिफोर्निया के लोक स्वास्थ्य विभाग के गोर्डन व्रदोलजक ने कहा, ‘अमेरिका में उत्पादों में पारे की सीमा प्रति दस लाख में एक भाग है.’ उन्होंने कहा, ‘विषैले उत्पादों की पहचान करना एक धीमी प्रक्रिया रही है. इसलिए हमने एक ऐसा उपकरण बनाया, जिसके जरिए एक्स-रे की तरंगों के माध्यम से सौंदर्य उत्पादों में मौजूद पारे की पहचान की जा सकती है.'

उन्होंने कहा, ‘पुरानी तकनीक से जहां एक उत्पाद की जांच करने में कई दिन लग जाते थे, वहीं नई तकनीक से एक दिन में 20 से 30 नमूनों का परीक्षण हो जाता है.’ उन्होंने बताया कि ऐसे उत्पादों की पहचान करके हम लोगों को जागरुक करते हैं कि वे उन उत्पादों का इस्तेमाल न करें.

प्रेग्‍नेंट हैं तो तुरंत काफी छोड़ दें, बच्‍चे को हो सकता है ल्‍यूकेमिया

अगर आप प्रेग्‍नेंट हैं और कॉफी की शौकीन हैं तो कुछ समय के लिए अपने इस शौक से दूरी बना लीजिए. जी हां, कॉफी से दूरी बनाकर आप अपने होने वाले बच्‍चे की सेहत को दुरुस्‍त रख सकती हैं. एक रिसर्च में पता चला है कि जो महिलाएं प्रेग्‍नेंसी के दौरान सिर्फ 2 कप कॉफी भी पीती हैं, उनके होने वाले बच्‍चे को ल्‍यूकेमिया होने का खतरा ज्‍यादा होता है.
रिसर्च में पता चला है कि कॉफी पीने वाली महिलाओं के बच्‍चों को बचपन में ही ल्‍यूकेमिया का खतरा 60 फीसदी तक ज्‍यादा होता है. जानकारों का कहना है कि सरकार को इस संबंध में चेतावनी जारी कर देनी चाहिए. सरकार को ठीक उसी तरह प्रेग्‍नेंसी के दौरान कॉफी नहीं पीने के लिए चेतावनी जारी करनी चाहिए, जिस तरह से शराब और स्‍मोकिंग के लिए की जाती है.

उनका मानना है कि कैफीन मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण की कोशिकाओं में डीएनए को बदल सकता है और इससे भ्रूण में ट्यूमर के पनपने का खतरा बढ़ सकता है. शोधकर्ताओं ने 20 से भी ज्‍यादा मौजूदा अध्‍ययनों को देखा और पाया कि जो महिलाएं प्रेग्‍नेंसी के दौरान कॉफी पीती हैं उनके बच्‍चों में ल्‍यूकेमिया का खतरा 20 फीसदी ज्‍यादा होता है. यही नहीं उन्‍हें ये भी पता चला कि जो महिलाएं दो कप से ज्‍यादा कॉफी पीती हैं उनके बच्‍चों के लिए खतरा 60 फीसदी बढ़ जाता है.
प्रसूति एवं स्त्री रोग से संबंधित अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार प्रेग्‍नेंसी के दौरान 4 या उससे ज्‍यादा कप कॉफी पीने वाली महिलाओं के बच्‍चों में ल्‍यूकेमिया का खतरा 72 फीसदी ज्‍यादा होता है. गौरतलब है कि यूके में हर साल 500 से भी ज्‍यादा बच्‍चों का ल्‍यूकेमिया का इलाज होता है और यह बच्‍चों में पाया जाने वाला सबसे आम कैंसर है. अच्‍छी बात ये है कि इसका पता जल्‍दी चल जाता है और कीमोथैरिपी से इसका इलाज हो जाता है, इसमें सफलता की दर भी 80 फीसदी है.

ग्रीन टी करती है स्‍पाइनल कॉर्ड के न्‍यूरॉन्‍स की सुरक्षा

अपनी दिनचर्या में ग्रीन टी को आज ही शामिल कीजिए, क्योंकि एक बेहतरीन एंटीऑक्सिडेंट होने के नाते स्‍पाइनल कॉर्ड में चोट लगने के बाद यह आपके तंत्रिका कोशिकाओं को सुरक्षा प्रदान करती है.
चीन के शोधकर्ताओं ने इसका प्रमाण पाया है, जिसके मुताबिक ग्रीन टी में पाया जाने वाला पॉलिफेनॉल्स स्‍पाइनल कॉर्ड की तंत्रिका कोशिकाओं को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस (कोशिकाओं को नष्ट करने की प्रक्रिया) से बचाव कर सकता है, जिससे मुक्त कणों के नुकसान में कमी आ सकती है.

चूहों पर किए गए शोध के बाद मुख्य शोधकर्ता जियान्बो झाओ और लियाओनिंग मेडिकल विश्वविद्यालय के सह शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रीन टी में पाया जाने वाला पॉलिफेनॉल्स ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को महत्वपूर्ण रूप से कम करता है, जिससे न्यूरोनल एपोप्टोसिस में कमी आती है. झाओ ने कहा, 'परिणाम के मुताबिक ग्रीन टी में पाया जाने वाला पॉलिफेनॉल्स स्‍पाइनल कॉर्ड की तंत्रिका कोशिकाओं को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से बचाता है.'


स्‍पाइनल कॉर्ड में चोट दो तरह के होते हैं- प्राथमिक और द्वितीयक. जब चोट यांत्रिक माध्यम से होता है, तो उसे प्राथमिक चोट, जबकि अन्य आंतरिक माध्यमों से होने वाले नुकसान को द्वितीयक की श्रेणी में रखा जाता है. यह अध्ययन पत्रिका 'न्यूरल रिजेनरेशन रिसर्च' में प्रकाशित हुआ है.

एक अनार सौ बीमार नहीं, सौ फायदे कहिए जनाब

अनार में कई स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं. यह स्वस्थ और खूबसूरत त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद है. वेबसाइट ‘femalefirst.co.uk' के अनुसार, प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक तरीकों से त्वचा की देखभाल करने वाले सौंदर्य प्रसाधनों के ब्रांड अर्बन वेद के ब्रांड प्रबंधक रेन होम्स का कहना है कि अनार में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट उम्र बढ़ने के कुप्रभावों से बचाता है.
इसके अलावा भी अनार कई मायनों में फायदेमंद है. अनार में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो बढ़ती उम्र में त्वचा को पोषण देता है, झुर्रियों से बचाता है और सेहत की दृष्टि से भी लाभदायक होता है. अनार का रस त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है. यही नहीं, इसके बीजों को त्वचा की स्क्रबिंग के लिए उपयोग किया जा सकता है.

आम खाने से मोटापा पीड़ितों के ब्लड शुगर का स्तर होगा कम

अब आम आपके स्वास्थ्य का ख्याल रखेगा. मोटापा से पीड़ित लोग अगर रोजाना आम का सेवन करें, तो उनके ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है. हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है.
अमेरिका के ओकलाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ ह्यूमन साइंस में पोषण विज्ञान के सहायक प्रोफेसर एड्रालिन लुकास ने कहा, 'निष्कर्ष में यह सामने आया कि मोटापा से पीड़ित लोग लगभग 100 ग्राम आम का रोजाना सेवन करें, तो यह उनके ब्लड शुगर का स्तर कम करने में मदद कर सकता है.' गौरतलब है कि आम में मैग्निफेरिन समेत कई जैव-सक्रिय यौगिक होते हैं, जो एक एंटीऑक्सिडेंट हैं और ब्लड शुगर स्तर को कम करने में सहायक है.

लुकास ने कहा, 'इसके अलावा, आम फाइबर से भरपूर होता है, जो ब्लड में शुगर के अवशोषण को कम करता है.'

अगर फैमिली जीन्स में है मोटापा, तो बेअसर रहेगा जिम

ताजा शोध के मुताबिक अगर आपकी फैमिली लाइन में मोटापे के जीन्स हैं, तो एक्सरसाइज आपके लिए बेअसर साबित हो सकती है. इसी रिसर्च में कुछ ऐसी औरतों पर स्टडी की गई, जिन्होंने 1 साल तक हर हफ्ते कम से कम 3 बार जिम किया हो. इतनी एक्सरसाइज के बाद भी जिन औरतों की फैमिली में मोटापे के जीन्स थे उनका वजन बढ़ा पाया गया.
दूसरी तरफ जिनकी फैमिली में मोटापे के शिकार लोगों की संख्या कम थी, उन्होंने 1 साल में काफी वजन कम किया.

एरिजोना यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 30 से 65 साल की उम्र की 84 महिलाओं के डीएनए सैंपल इकट्ठा किए. उन सभी डीएनए को मोटापा बढ़ाने वाले 21 जीन्स के साथ चेक किया गया . फिर उन औरतों को वेटलिफ्टिंग के साथ-साथ मशीनों से भी तमाम एक्सरसाइजेज करवाई गई. सभी को एक सा खाना खाने को कहा गया. लेकिन जिनमें मोटापे के जीन्स कम थे उनमें औसतन 3 पाउंड वजन आसानी से कम हो गया. जिनमें मोटापे के जीन्स ज्यादा थे, उनमें औसतन 2.6 पाउंड का वजन बढ़ा हुआ पाया गया.


इससे यह तो साफ है कि हमारा डीएनए एक्सरसाइज पर प्रभाव डालता है. लेकिन मोटापे वाले जीन्स होने का मतलब यह नहीं कि आप वजन घटा नहीं सकते. एक्सरसाइज से वजन घटाना बिलकुल संभव है. लेकिन अगर आपकी फैमिली लाइन में मोटापे के जीन्स हैं तो यह काम आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है. ब्रिटिश एक्सपर्ट्स के हिसाब से वेट ट्रेनिंग के मुकाबले एरोबिक एक्सरसाइजेज (जैसे जॉगिंग, साइकिलिंग और स्विमिंग) वजन घटाने में ज्यादा कारगर हैं.

अब पूरे देश में पेट्रोलियम मंत्रालय ने लॉन्‍च की एलपीजी कनेक्शन पोर्टेबिलिटी

अब देश भर के रसोई गैस उपभोक्ता यदि चाहें तो मर्जी से अपना रसोई गैस का डीलर और कंपनी बदल सकते हैं. यह ऐलान पेट्रोलियम मंत्रालय ने बुधवार को किया.
पिछले साल अक्टूबर में एलपीजी कनेक्शन पोर्टेबिलिटी की स्कीम को देश के 13 राज्यों के 24 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पर लागू किया गया था. अब इसे पूरे देश के 480 जिलों के 8 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के लिए लागू करने का ऐलान किया गया है. इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए ग्राहकों को अपनी तेल कंपनी के वेबसाइट पर रजिस्टर कर अप्लाई करना होगा. ऐसा करने के बाद ग्राहक को कंपनी से पोर्टेबिलिटी की गुजारिश माने जाने की कन्फर्मेशन ई मेल आएगी.

अगर ग्राहक अपनी कंपनी के भीतर ही डीलर बदलना चाहता है तो ग्राहक को अपनी इच्छा के डीलर के पास ये मेल लेकर जाना होगा. अगर ग्राहक कंपनी के बाहर यानी किसी दूसरी सरकारी तेल कंपनी के डीलर के पास अपना कनेक्शन ट्रांसफर करना चाहता है, तो ग्राहक को अपने वर्तमान डीलर के पास अपने सिलेंडर और रेगुलेटर जमा करके ट्रांसफर डॉक्यूमेंट लेकर अपनी पसंद के डीलर के पास जाना होगा. पिछले डीलर से मिला सिक्योरिटी डिपोजिट देकर सिलेंडर और रेग्युलेटर लेना होगा.

कंपनी बदलने पर भी ग्राहक को नई कंपनी से कनेक्शन के लिए अपना पहले वाला ही सिक्योरिटी डिपोजिट देना होगा. यानी ग्राहक पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा. ट्रांसफर की ये सुविधा ग्राहकों के लिए मुफ्त है.

दूरसंचार कंपनियों को पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी मई तक लागू करने का निर्देश

सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सुविधा अगले साल तीन मई तक लागू करने का निर्देश दिया है. इस कदम से उपभोक्ताओं को दूसरे राज्य या लाइसेंस सेवा क्षेत्र में स्थानांतरित होने पर भी अपना नंबर कायम रखने में मदद मिलेगी.
फिलहाल एमएनपी नियमों के तहत उपभोक्ताओं को अपना ऑपरेटर बदलने के दौरान समान सेवा क्षेत्र में ही अपना नंबर बरकरार रखने की अनुमति होती है. देश में 22 दूरसंचार सर्किल या सेवा क्षेत्र हैं. पूर्ण एमएनपी व्यवस्था में दिल्ली-एनसीआर का कोई उपभोक्ता किसी दूसरे राज्य में उसी आपरेटर या दूसरे ऑपरेटर के नेटवर्क पर स्थानांतरित होने के दौरान अपना मोबाइल नंबर बरकरार रख सकेगा.

समान सर्किल में एमएनपी सुविधा वर्ष 2010-11 में शुरू की गई थी. दूरसंचार विभाग के ऑपरेटरों को भेजे गए तीन नवंबर के पत्र में कहा गया है कि अब इस देश में पूर्ण एमएनपी को लागू करने का फैसला किया गया है. इससे उपभोक्ताओं को दूसरे लाइसेंस क्षेत्रों में भी अपना नंबर कायम रखने की सुविधा मिलेगी. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त तक कुल 13 करोड़ लोगों ने एमएनपी सुविधा के लिए आग्रह किया था.

पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी 31 मार्च तक

मोबाइल फोन उपभोक्ता जल्द ही अपने दूरसंचार आपरेटर बदल सकेंगे और ऐसे इलाकों में जाने के बावजूद अपने फोन नंबर बनाए रख सकेंगे जहां अमुक सेवा प्रदाता की सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं. वर्तमान में, मोबाइल उपभोक्ताओं को समान सेवा क्षेत्रों में ही मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) ऑपरेटर बदलने की सुविधा है. मसलन, दिल्ली एनसीआर में एक उपभोक्ता दिल्ली एनसीआर में ही ऑपरेटर बदल सकता है.
एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि दूरसंचार विभाग ने पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी लागू करने के लिए 31 मार्च, 2015 की समय सीमा तय की है. उसने कहा, ‘दूरसंचार आयोग ने पूर्ण एमएनपी पर ट्राई की सिफारिशें स्वीकार ली हैं.’ आयोग के निर्णय को अंतिम मंजूरी के लिए अब दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद के समक्ष रखा जाएगा.

पूर्ण एमएनपी के तहत उपभोक्ता देश में कहीं भी स्थानांतरित होने की स्थिति में अपना पुराना नंबर बरकरार रख सकेंगे. ट्राई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, करीब 13 करोड़ लोगों ने 31 अगस्त तक एमएनपी सुविधा के लिए अनुरोध किया है.

ट्राई ने पूर्ण एमएनपी पर अपनी सिफारिश में प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने की तिथि से छह माह का समय दूरसंचार कंपनियों को देने का सुझाव दिया है ताकि वे अपने नेटवर्क में आवश्यक बदलाव कर सकें.

सरकार ने दी चेतावनी, नंबर पोर्टेबिलिटी पर डेडलाइन चूके तो होगी कार्रवाई

सरकार पूर्ण रूप से मोबाइल नंबर पोर्टेबलिटी (MNP) के लिये तीन मई की समयसीमा का पालन नहीं करने वाली दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी.
दूरसंचार सचिव राकेश गर्ग ने कहा, ‘हमने दूरसंचार कंपनियों को छह महीने का पर्याप्त समय दिया है. यह पहला मौका नहीं है जब देश में MNP लागू हो रहा है. हम केवल इसे देश भर में लागू कर रहे हैं. अगर वे समयसीमा से चुकते हैं तो कानून के तहत जो भी कार्रवाई उचित होगी, की जाएगी.’ अभी केवल अपने अपने सर्किल के भीतर ही मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की सुविधा है. इसके तहत ग्राहक पुराना नंबर बकरार रखते हुए दूरसंचार सेवा प्रदाता बदल सकते हैं.

पूर्ण रूप से MNP लागू होने से ग्राहक देश में कहीं भी जाने पर अगर दूरसंचार कंपनी बदलते हैं या एक शहर से दूसरी जगह जाते हैं तो अपना पुराना नंबर बरकरार रख सकेंगे.


गौरतलब है कि उद्योग संगठन सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने पिछले सप्ताह कहा था कि दूरसंचार कंपनियां तीन मई की समयसीमा का संभवत: पालन नहीं कर पाएंगी. इसका कारण तकनीकी तथा समन्वय मुद्दा है. साथ ही उनका कहना है कि दूरसंचार नियामक प्राधिकरण द्वारा पूर्ण रूप से MNP अधिसूचित करने में देरी से भी उन्हें समस्या हो रही है.

पीएम ने शुरू की मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा

मोबाइल फोन ग्राहकों को अब पूरे देश में बिना अपना नंबर बदले आपरेटर बदलने की आजादी होगी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को देश भर में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) नाम की इस सेवा के लागू होने की औपचारिक घोषणा की. इससे जीएसएम और सीडीएमए दोनों श्रेणियों में 70 करोड़ मोबाइल ग्राहकों को लाभ होगा.
एमएनपी के तहत ग्राहकों को अपना नंबर बदले बिना ऑपरेटर बदलने की सुविधा मिलेगी. माना जा रहा है कि एमएनपी सेवा के साथ अब आपरेटरों का ध्यान नए ग्राहक बनाने के बजाय अपने पुराने ग्राहकों को रोकने पर रहेगा. मोबाइल उपभोक्ता को अपने नेटवर्क को बदलने के लिए अधिकतम 19 रुपये का शुल्क देना होगा.

नए ऑपरेटर जिसकी ओर ग्राहक स्थानांतरित हो रहा है, उसे यह विकल्प होगा कि वह इस शुल्क को समाप्त कर दे या इसमें कटौती कर दे. दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई के दिशानिर्देर्शों के अनुसार, ग्राहक को नया ऑपरेटर सात कार्यदिवसों में मिल जाएगा.


इस सेवा की शुरुआत की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अभी तक ऑपरेटर नए ग्राहक हासिल करने के लिए संघर्ष करते थे. अब इस सेवा के शुरू होने के बाद ऑपरेटरों को पुराने ग्राहकों को कायम रखने के लिए नवप्रवर्तन तथा बेहतर गुणवत्ता वाली सेवाएं देनी होंगी.’ प्रधानमंत्री ने अपने बगल में बैठे दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को कॉल करके इस सेवा की शुरूआत की.

फिर बढ़ी मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की डेट

केंद्र सरकार ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) को पूरी तरह लागू करने की डेट दो माह बढ़ाने का फैसला लिया है. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कई ऑपरेटरों की ओर से पूर्ण एमएनपी के लिए जरूरी हार्डवेयर और साफ्टवेयर लगाए जा चुके हैं. इन ऑपरेटरों की ओर से इंटरनल टेस्टिंग चल रही है. इस संबध में अंतिम टेस्टिंग जल्द ही शुरू होंगी और इसे अधिकतर ऑपरेटर अगले दो माह में पूरा कर लेंगे.
सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण( ट्राई) की 3 नवबंर 2014 की सिफारिशों को मंजूरी दी गई थी. इन सिफारिशों को छह माह के भीतर लागू करना था. बयान में कहा गया है कि एमएनपी को पूरी तरह लागू करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.

इस संबध में ट्राई ने भी 25 फरवरी, 2015 को नियम जारी किए थे. इन नियमों में किसी नंबर को दूसरे नेटवर्क पर शुरू करने की और एमएनपी को पूरी तरह लागू करने के लिए डीटेल प्रक्रिया और स्टेप बताए गए थे.

- इनपुट IANS

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