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Sunday, May 3, 2015

गूगल ने रंगबिरंगा डूडल जारी कर मनाया होली का जश्‍न

 पूरे देश में होली की धूम है। लोग होली की मस्ती में झूम रहे हैं, ऐसे में भला गूगल कैसे पीछे रह सकता है। गूगल ने शुक्रवार को होली के त्यौहार पर रंगरंगीला डूडल जारी किया। गूगल के होम पेज पर शुक्रवार को होली के अवसर पर खास एनिमेशन दिखा।

इसमें गूगल के नाम पर विभिन्न प्रकार के रंग की फुहारें छोड़ते हुए दिखाया गया है। गूगल के इस डूडल में हरे, लाल, पीले, नारंगी और नीले रंगों के बीच सफेद रंग से गूगल लिखा हुआ नजर आ रहा है। यह सभी रंग फुहार के रूप में छूटते हुए दिख रहे हैं। गूगल के इस डूडल पर क्लिक करते ही होली से जुड़े पेज, और उससे संबंधित जानकारियों वाले पेज खुल रहे हैं। यह पांचवी वार है जब गूगल ने होली पर डूडल बनाया है। इससे पहले गूगल ने साल 2014 में भी डूडल के जरिये से होली का जश्न मनाया था।

नासा के मार्स रोवर ने मंगल ग्रह पर पूरे किये 11 साल

नासा का ऑपरच्युनिटी मार्स रोवर दूसरे ग्रह पर सबसे अधिक समय तक रहते हुए सबसे लंबी दूरी तय करने वाला पहला मानवनिर्मित यान बन गया है।


ऑपरच्युनिटी ने मंगल ग्रह के धरातल पर 26 मील यानी 42 किलोमीटर की दूरी 11 साल दो महीने में पूरी की। हालांकि वैज्ञानिकों को शुरूआत में इसके कुछ ही महीने तक काम करने की उम्मीद थी। सौर चालित रॉबोट जनवरी, 2011 को मंगल के इगल क्रेटर में उतरा था।

केलिफोर्निया में पासाडोना स्थित नासा के जेट प्रोपलशन प्रयोगशाला में ऑपरच्युनिटी के प्रबंध निदेशक जॉन कल्लास ने कहा, ‘यह पहली बार हुआ है कि किसी भी रोवर ने दूसरे ग्रह की सतह पर इतनी अधिक दूरी तय की।’

अपने मिशन के दौरान ऑपरच्युनिटी और उसके जुड़वे स्पिरिट ने पता लगाया कि मंगल पर कभी जलीय वातावरण था और कुछ हद तक जीवन के अनुकूल दशाएं थीं।

भारत ने आईआरएनएसएस-1डी का किया सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

भारत ने शनिवार को यहां से पीएसएलवी..सी27 के जरिये आईआरएनएसएस..1डी को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया, जिसके बाद देश स्वयं की नेवीगेशनल प्रणाली शुरू करने को तैयार है।


59.5 घंटे की उल्टी गिनती के समापन पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विश्वसनीय प्रक्षेपण यान पीएसएलवी.सी27 का यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शाम पांच बजकर 19 मिनट पर प्रक्षेपण हुआ। पीएसएलवी.सी27 ने प्रक्षेपण के 21 मिनट बाद उपग्रह को उसकी कक्षा में छोड़ दिया।

इसरो के अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने कहा कि मिशन सफल रहा और उपग्रह को सही कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। इसरो के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के बाद कुमार की यह पहली परियोजना थी।

कुमार ने कहा, ‘मैं पीएसएलवी के 28वें सफल मिशन के लिए इसरो की पूरी टीम को बधाई देता हूं जिसने आईआरएनएसएस..1डी को उसकी कक्षा में स्थापित किया जो कि नेवीगेशनल उपग्रह समूह का चौथा उपग्रह है।’

कुमार ने कहा कि पीएसएलवी ने यह दिखा दिया है कि पूर्व के उस प्रक्षेपण कार्यक्रम में बाधा आने के बावजूद उसने विकास की पराकाष्ठा प्राप्त कर ली है जिसे उसकी एक उप प्रणाली में समस्या आने के बाद नौ मार्च से आगे खिसका दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘हमने आज एक सफल प्रक्षेपण किया।’ इस प्रक्षेपण से देश इंडियन रीजनल नेविगेशनल सैटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) शुरू करने के लिए तैयार हैं क्योंकि भारत ने सात उपग्रहों के समूह में से चार उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित कर दिया है।

परियोजना निदेशक पी कुन्हीकृष्णन ने कहा, ‘यह मिशन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि हम नेविगेशनल प्रक्रिया शुरू करने के लिए कक्षा में चार उपग्रह की न्यूनतम जरूरत को पूरी कर रहे हैं।’ आईआरएनएसएस..1डी नेविगेशनल, ट्रैकिंग और मानचित्रण सेवा मुहैया कराएगा और इसका जीवन 10 वर्षों का होगा। इसरो ने आईआरएनएसएस गठन के लिए सात उपग्रहों के जिस समूह की योजना बनायी है उसमें आईआरएनएसएस..1डी चौथा होगा। एक बार सभी उपग्रह प्रक्षेपित होने के बाद आईआरएनएसएस अमेरिकी जीपीएस नेवीगेशनल प्रणाली के समकक्ष होगा।

चार उपग्रह आईआरएनएसएस का काम शुरू करने के लिए पर्याप्त होंगे, बाकी तीन उपग्रह उसे और सटीक एवं कुशल बनाएंगे। इसरो के एक और सफल प्रक्षेपण और इस वर्ष के उसके पहले मिशन के तहत 44.4 मीटर लंबा चार चरण वाला ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान 1425 किलोग्राम भार लेकर आकाश को चीरता हुआ अंतरिक्ष में रवाना हुआ। यान ने जैसे ही उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया, वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे। इस मिशन में पीएसएलवी के एक्सएल संस्करण का इस्तेमाल किया गया जो कि इस रॉकेट का 28वां सफल प्रक्षेपण था।

चंद्रयान.1, जीसैट.12, रिसैट.1, आईआरएनएसएस..1ए, मार्स आर्बिटर अंतरिक्षयान, आईआरएनएसएस.1बी और आईआरएनएसएस..1सी के बाद यह आठवीं बार था जब एक्सएल संस्करण का इस्तेमाल किया गया। आईआरएनएसएस प्रणाली को इस वर्ष तक पूरा करने की योजना बनायी गई है जिस पर कुल 1420 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह दक्षिण एशिया पर लक्षित होगा और इसे देश के साथ ही उसकी सीमा से 1500 किलोमीटर तक के उपयोगकर्ताओं को सटीक स्थिति की सूचना मुहैया कराने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके जरिये स्थलीय और समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग और बेड़ा प्रबंधन, पर्वतारोहियों और यात्रियों के लिए दिशासूचक सहायता तथा गोताखोरों के लिए दृश्य एवं आवाज नेविगेशन सुविधा मुहैया करायी जाएगी।

आईआरएनएसएस श्रृंखला के पहले तीन उपग्रहों का प्रक्षेपण क्रमश: एक जुलाई 2013, पिछले वर्ष चार अप्रैल और 16 अक्तूबर को किया गया था। आईआरएनएसएस प्रणाली दो तरह की सेवाएं मुहैया कराएगा जिसमें एक मानक पोजीशनिंग सेवा जो कि सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी तथा सीमित सेवा जो कूट सेवा होगी एवं केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ही मुहैया होगी।

किरण कुमार ने इसके साथ ही गांधी शांति पुरस्कार प्राप्त करने के लिए इसरो की पूरी टीम को बधाई दी।

उन्होंने कहा, ‘इसरो दशकों से जो काम कर रहा है, यह उसका वास्तव में बड़ा सम्मान है..मैं पूरे देश, सरकार, प्रधानमंत्री और कैबिनेट के सभी सदस्यों को इसरो में विश्वास जताने तथा समाज की भलाई के लिए उसके योगदान को सम्मानित करने के लिए धन्यवाद देता हू।’

Saturday, May 2, 2015

बुध ग्रह पर टकराया नासा का अंतरिक्षयान, खत्म हुआ 11 साल का अभियान

नासा का अंतरिक्षयान मैसेंजर बुध ग्रह की सतह पर क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके कारण इसके ऐतिहासिक 11 वर्षीय अभियान का अंत हो गया। इस अभियान ने ग्रह के बारे में महत्वपूर्ण आंकड़े और इसकी हजारों तस्वीरें उपलब्ध करवाई थीं।


मेरीलैंड स्थित जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी अप्लाइड फीजिक्स लेबोरेट्री में इस अभियान के नियंत्रणकर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि मैसेंजर (मरकरी सरफेस, स्पेस एनवायरमेंट, जियोकेमिस्ट्री एंड रेंजिंग) नामक अंतरिक्ष यान भविष्यवाणी के मुताबिक गुरूवार को बुध की सतह से टकरा गया।

मैसेंजर को तीन अगस्त 2004 को प्रक्षेपित किया गया था और इसने 18 मार्च 2011 को बुध की कक्षा में घूमना शुरू किया था। इस अंतरिक्षयान ने मार्च 2012 तक अपने प्राथमिक वैज्ञानिक लक्ष्यों को पूरा कर लिया था।

चूंकि मैसेंजर की शुरूआती खोजों ने कुछ नए एवं महत्वपूर्ण सवाल उठाए थे और पेलोड भी अच्छी स्थिति में था, इसलिए इस अभियान को दो बार विस्तार दिया गया था। इस अंतरिक्षयान ने बेहद कम उंचाई से अवलोकन करने, तस्वीरें खींचने और ग्रह के बारे में अभूतपूर्व जानकारी जुटाने के काम को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

पिछले माह जब इस अभियान को एक अंतिम लेकिन अल्पकालीन विस्तार दिया गया। इस दौरान अंतरिक्षयान ने ग्रह के बेहद करीब यानी सतह से महज 5 से 35 किलोमीटर की उंचाई के बीच काम किया।

28 अप्रैल को इस टीम ने सात कक्षकों के पथ संशोधन के कार्य के तहत अंतिम संशोधन को भी सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया था। इसके लिए मैसेंजर को एक अतिरिक्त माह के लिए हवा में रहना पड़ा था। यह अवधि महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने वाले किसी अंतरिक्ष यान के यंत्रों के लिए काफी ज्यादा थी।

अंतत: मैसेंजर सूर्य के गुरूत्वीय खिंचाव के कारण अपने कक्षक में होने वाले विचलन का सामना नहीं कर सका और 8750 मील प्रति घंटा की गति से बुध की सतह से टकरा गया। इसके कारण 52 फुट गहरा एक नया गड्ढा वहां सतह पर बन गया।

मैसेंजर के प्रमुख जांचकर्ता और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लेमंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के निदेशक सीन सोलोमन ने कहा, ‘आज हम हमारे पड़ोसी ग्रहों के बारे में खोज करने वाले सबसे अधिक प्रवीण अंतरिक्षयानों में से एक यान को विदा दे रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हमारे यान ने सूर्य के निकटतम ग्रह के कक्षक में चार साल से भी ज्यादा समय बिताया और वहां की अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक विकिरण को भी सहा।’ मैसेंजर की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने बताया, ‘इसने बुध की सतह की संरचना का पता लगाया। इसके भौगोलिक इतिहास को उजागर किया और यह भी खोज की कि इसका आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र ग्रह के केंद्र से लंबवत दूरी पर है।’

एजेंसी

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